संचार उपग्रह परियोजना जीसैट-15 और जीसैट-16 के विकास और उनके प्रक्षेपण को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो संचार उपग्रह परियोजनाओं जीसैट-15 और जीसैट-16 के विकास और उनके प्रक्षेपण के प्रस्ताव को 28 जून 2013 को मंजूरी दी.

Created On: Jun 29, 2013 12:42 ISTModified On: Jun 29, 2013 12:44 IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो संचार उपग्रह परियोजनाओं जीसैट-15 और जीसैट-16 के विकास और उनके प्रक्षेपण के प्रस्ताव को 28 जून 2013 को मंजूरी दी. इसका उद्देश्य मौजूदा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान कराना है.

संचार उपग्रह जीसैट-15 से संबंधित मुख्य तथ्य

संचार उपग्रह जीसैट-15 का निर्माण आकस्मिक जरूरतों के लिए कक्ष में मौजूद अतिरिक्त क्षमता के प्रयोग और मौजूदा उपयोगकर्ताओं की सेवाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रयास का हिस्सा है. इस उपग्रह द्वारा आवश्यक अतिरिक्त क्षमता प्रदान की जानी है. इस उपग्रह द्वारा केयू बैंड की क्षमता में वृद्धि की जानी है. वर्तमान में संचालित 9 इनसैट/जीसैट उपग्रह लगभग 195 ट्रांसपोंडरों को विभिन्न फ्रिक्वेंसी बैंड प्रदान कर रहे हैं. जीसैट-15 उपग्रह द्वारा पूरे भारत को कवर किया जाना है. यह जीसैट-8 उपग्रह से मिलता जुलता होना है. प्रक्षेपण सेवाओं सहित परियोजना की कुल लागत 859.5 करोड़ रुपए निर्धारित है.

संचार उपग्रह जीसैट-16 से संबंधित मुख्य तथ्य

जीसैट-16 परियोजना द्वारा आकस्मिक आवश्यकताओं, वर्तमान उपभोगकर्ताओं की संरक्षित सेवाओं को पूरा किया जाना है और देश में मौजूद दूर-संचार, टेलीविज़न, वीएसएटी और अन्य उपग्रह आधारित सेवाओं में मदद के साथ इनका विकास भी किया जाना है. यह उपग्रह जीएसएटी-10 के समान होना है. प्रक्षेपण सेवाओं सहित इस परियोजना की कुल लागत 865.50 करोड़ रुपए निर्धारित है.

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