सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुंबई हमले के दोषी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की फांसी की सजा बरकरार

India Current Affairs 2012. सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई पर 26 नवंबर 2008 में हुए आतंकवादी हमले में पकड़े गए एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की फांसी की सजा 29 अगस्त 2012 को बरकरार रखी...

Created On: Aug 30, 2012 11:50 ISTModified On: Aug 31, 2012 17:09 IST

सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई पर 26 नवंबर 2008 में हुए आतंकवादी हमले में पकड़े गए एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की फांसी की सजा 29 अगस्त 2012 को बरकरार रखी.

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने यह निर्णय दिया. न्यायालय ने कसाब की अपील खारिज करने के साथ ही इस आतंकी वारदात में सबूतों के अभाव में दो अन्य अभियुक्तों को बरी करने के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की अपील भी खारिज कर दी.

विदित हो कि मुंबई की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2010 में अजमल आमिर कसाब के खिलाफ फांसी की सजा सुनाई थी. अजमल आमिर कसाब ने इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसे न्यायालय ने फरवरी 2011 में अमान्य कर दिया था. उसके बाद उसने मृत्युदंड के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.

अजमल आमिर कसाब नौ अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ 26 नवंबर, 2008 को कराची से समुद्र के रास्ते दक्षिण मुंबई पहुंचा था. उसके बाद उन्होंने एक निजी भारतीय नौका एमबी कुबेर को अगवा कर लिया था और उसके नाविक अमर चंद सोलंकी को मार डाला था. इन आतंकवादियों ने मुंबई में सीएसटी रेलवे स्टेशन, कामा अस्पताल, विनोली चौपाटी, ओबेरॉय होटल, ताज होटल, नरिमन हाउस और ल्योपर्ड कैफे में अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस आतंकी हमले में 166 व्यक्ति मारे गए थे जबकि 238 अन्य जख्मी हुए थे. मुंबई पर 26 नवंबर 2008 को हमला करने वाले 10 आतंकवादियों में से कसाब एकमात्र ऐसा आतंकवादी है, जिसे जीवित पकड़ा गया था.

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