सूचना और प्रसारण मंत्रालय की क्षेत्रीय अभिनव परिषद द्वारा रिपोर्ट पेश

India Current Affairs 2012. सूचना और प्रसारण मंत्रालय की क्षेत्रीय अभिनव परिषद ने अपनी रिपोर्ट सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को 26 जुलाई 2012 को पेश...

Created On: Jul 30, 2012 05:40 ISTModified On: Jul 30, 2012 17:42 IST

सूचना और प्रसारण मंत्रालय की क्षेत्रीय अभिनव परिषद ने अपनी रिपोर्ट सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को 26 जुलाई 2012 को पेश की. सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सेवानिवृत्त सचिव आशा स्वरूप की अध्यक्षता वाली यह परिषद सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में गठित क्षेत्रीय अभिनव परिषदों में पहली परिषद है जिसने संबद्ध मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इस परिषद का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण व्यवस्था संबंधी एक नीति तैयार करना था जिसमें नए विचार मुख्य धारा में शामिल किए जाएंगे और सरकार द्वारा नीतिगत पहल का रूप लेंगे.

परिषद ने अपनी रिपोर्ट में मीडिया और मनोरंजन उद्योग की विकास क्षमता का विश्लेषण किया है और इसके लिए उसने प्रसारण, प्रिंट मीडिया, एनीमेशन, गेमिंग, वीएफएक्स, मीडिया शिक्षा और फिल्म जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में परिवर्तन की सिफारिशें की हैं.

परिषद ने मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र से संबंधित सात क्षेत्रों में 64 सिफारिशें की हैं. इनमें से कुछ प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित हैं.

• परिषद ने एक राष्ट्रीय मीडिया नीति तैयार करने की सिफारिश की है जो मीडिया संबंधी नई समस्याओं का समाधान करे.
• सरकार लाइसेंसिंग संबंधी मौजूदा प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं पर विचार करे ताकि प्रसारण क्षेत्र का अधिक उदारीकरण और सुधार सुनिश्चित किया जा सके.
• सूचना और प्रसारण मंत्रालय सार्वजनिक सेवा प्रसारण और सामुदायिक रेडियो सेवा (सीआरएस) की नीतिगत प्रमुख होने के नाते एक औपचारिक व्यवस्था कर सकती है जिसके द्वारा सीआरएस समुदाय आधारित कार्यक्रम के विषय आकाशवाणी को उपलब्ध कराएगा और आकाशवाणी विषय सृजन, प्रबंधन और केंद्रों के संचालन में सीआरएस के कार्यकर्ताओं को क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा.
• दूरदर्शन और आकाशवाणी डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया से हवाई तरंगें जारी करे जिनका घर में उचित उपयोग के बाद सार्वजनिक सेवा प्रसारण कोष बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है. यह कोष दूरसंचार क्षेत्र में अमरीका के यूएसओ कोष जैसा होगा. इस कोष का एकमात्र सार्वजनिक सेवा प्रसारण के लिए उपयोग किया जा सकता है.
• फिल्म क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए परिषद ने एक राष्ट्रीय फिल्म नीति की सिफारिश की है जिसमें सरकार बनाम निजी क्षेत्र की भूमिका दर्शायी जाएगी.
• देश में फिल्म संस्थानों का उन्नयन करके उन्हें श्रेष्ठता का केंद्र बनाया जा सकता है. अंततः एक उचित कानून बनाकर श्रेष्ठता के इन केंद्रों को फिल्म, प्रसारण और एनीमेशन के केंद्रीय विश्वविद्यालय का हिस्सा बनाया जा सकता है.
• मंत्रालय मीडिया और मनोरंजन के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय अभिनव पुरस्कार गठित कर सकता है.
• डीएवीपी, आरएनआई, सीबीएफसी और लाइसेंस संबंधी गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चत करने के लिए ई-मोड ट्रॉजेक्शन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
विदित हो कि भारत सरकार द्वारा 2010-2020 को अभिनव दशक घोषित करने के सिलसिले में 28 जुलाई 2011 को क्षेत्रीय अभिनव परिषद का गठन किया था. इसके अनुसरण में सरकार ने सैम पित्रोदा के नेतृत्व में राष्ट्रीय अभिनव परिषद का गठन किया था.

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