हरि‍याणा में प्रति‍हार-काल की 1000 वर्ष पुरानी टकसाल प्राप्त हुई

हरि‍याणा में रोहतक के बोहर माजरा गांव में प्रति‍हार-काल की सि‍क्‍के ढालने वाली एक टकसाल हुई.

Created On: Mar 3, 2014 12:13 ISTModified On: Mar 3, 2014 12:17 IST

हरि‍याणा में रोहतक के बोहर माजरा गांव में प्रति‍हार-काल की सि‍क्‍के ढालने वाली एक टकसाल हुई. प्राप्‍त अवशेषों से पता लगता है कि‍ यह टकसाल प्रति‍हार वंश के शक्‍ति‍शाली राजा मि‍हि‍र भोज के काल की है. राजा मि‍हि‍र भोज ने सन 836 और 885 ईसवी में कन्नौज पर शासन किया था. देश में प्रति‍हार-काल से जुड़ी यह पहली खोज है.

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यह टकसाल उस छोटे से गांव के 100 मीटर के क्षेत्र में फैली है.

रोहतक के महर्षि दयानन्‍द वि‍श्‍ववि‍द्यालय के सेवानिवृत शि‍क्षक प्रोफेसर मनमोहन कुमार की सूचना पर भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण वि‍भाग (एएसआई) के एडीजी डॉ. मणि‍ ने बोहर माजरा गांव का दौरा कि‍या. बताए गए स्‍थान पर बने टीले के नीचे खुदाई करवाई गई तो उस स्‍थान से सि‍क्‍के ढालने के मि‍ट्टी के बर्तनों के 31 अवशेष मि‍ले.

खोज के बाद एएसआई के एडीजी डॉ. बी.आर. मणि‍ और उनके सहायक अधि‍कारी वी.सी. शर्मा और एएसआई के चंडीगढ़ सर्कि‍ल के स्‍टाफ ने मि‍लकर इस स्‍थान की और खुदाई तथा देखरेख का काम शुरू कर दि‍या.

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