असम विधानसभा चुनाव के दौरान 10 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी आरंभ किया जायेगा

वीवीपीएटी - मतदाता-सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रायल

मतदाता-सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) 23 फरवरी 2016 को चर्चा में था क्योंकि इसके द्वारा मतदाता चुनावों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं.

यह असम के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा 10 निर्वाचन क्षेत्रों (लगभग 2400 पोलिंग बूथ) में आरंभ किये जाने की घोषणा के बाद चर्चा में आया. उनके अनुसार कामरूप मेट्रो जिले में दिसपुर और जलुकाबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र इसके अधीन होंगे.

वीवीपीएटी एक स्वतन्त्र सत्यापन सिस्टम प्रदान करती है जिसके तहत मतदाता इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) द्वारा वोट किये जाने के बाद अपने मत की जानकारी प्राप्त कर सकता है.


इसमें इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन के साथ एक प्रिंटर जैसी मशीन लगाई जाती है जो सत्यापन रसीद जारी करती है जिसपर क्रमांक, नाम, प्रत्याशी का नाम एवं चुनाव चिन्ह अंकित होगा. इससे यह सत्यापित किया जा सकेगा कि मतदाता द्वारा उसकी इच्छानुसार ही मतदान दर्ज हुआ है.

रसीद के एक बार देख लिए जाने के बाद दुर्लभ से दुर्लभ हालात में ही मतदान अधिकारी द्वारा देखा जा सकेगा.

इससे मतदाता गलत मतदान की स्थिति में आवाज़ उठा सकता है. नए नियमों के अनुसार, बूथ ऑफिसर मतदाता द्वारा किये गये मतदान की गिनती रखेगा एवं उसे वोट गिनती के समय ही खोला जायेगा.

वीवीपीएटी का विचार 4 अक्टूबर 2010 को आल पार्टी मीटिंग के दौरान रखी गयी थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने चुनाव नियम, 1961, की आचार संहिता में संशोधन करके इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ वीवीपीएटी का उपयोग करने के लिए अधिसूचना जारी की.

पहली बार वीवीपीएटी मशीन का उपयोग नागालैंड में सितंबर 2013 को तुएनसांग जिले में नोक्सेन विधानसभा सीट के लिए हुए मतदान के दौरान किया गया.

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