एम्स में भारत का पहला मल्टी-स्क्लेरोसिस क्लिनिक खोला जायेगा

एम्स-दिल्ली द्वारा मल्टीपल स्क्लेरोसिस के बेहतर निदान और उपचार के लिये देश का पहला मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्लिनिक खोला जायेगा. एम्स द्वारा यह क्लिनिक जून के दूसरे सप्ताह में खोला जायेगा.
भारत में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बड़े पैमाने पर इस महामारी के संबंध में अध्ययन करने, समर्पित मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्लीनिक खोलने, इष्टतम पुनर्वास आदि जैसी अन्य सेवाओं की अत्यधिक आवश्यकता है.
मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्या है?
•    मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसा रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही माइलिन (वसायुक्त पदार्थ जो तंत्रिका तंतुओं के चारों और स्थित होता है तथा आवरण के रूप में काम करता है), तंत्रिका तंतुओं तथा शरीर में माइलिन का निर्माण करने वाली विशेष कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है.
•    इसके लक्षण सामान्य होते हैं, इसलिये लोग अक्सर इस बीमारी को जल्दी पहचान नहीं पाते हैं. इस बीमारी के निदान में लंबा समय लग जाता है.
•    यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, विशेष रूप से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और दृष्टि से संबंधित नसों को प्रभावित करती है.
•    इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं - मांसपेशियों की कमज़ोरी और अकड़न, मूत्राशय की समस्याएँ: मरीज़ को मूत्राशय में समस्या महसूस होती है, बार-बार या अचानक पेशाब करने की आवश्यकता होती है, मूत्राशय पर नियंत्रण का खत्म हो जाना इस बीमारी का प्रारंभिक संकेत है; रीढ़ की हड्डी में क्षतिग्रस्त तंत्रिका तंतु, धुंधली या दोहरी दृष्टि की समस्या, भावनात्मक परिवर्तन और अवसाद, संज्ञानात्मक (निर्णय लेने में समस्या) नुकसान.
मल्टी-स्क्लेरोसिस क्लिनिक की आवश्यकता
•    यह बीमारी पश्चिम के देशों में अधिक प्रचलित रही है, लेकिन हाल के दिनों में भारत में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं.
•    20-40 वर्ष आयु वर्ग के वयस्क, विशेष रूप से महिलाएँ मल्टीपल स्क्लेरोसिस की चपेट में आती हैं.
•    भारत में लोगों को इस बीमारी से बचाने, रोग को फैलने से रोकने तथा इस महामारी के संबंध में अध्ययन करने, समर्पित मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्लीनिक खोलने की अत्यधिक आवश्यकता है.

 

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