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Air India Sale: टाटा संस, स्पाइसजेट ने लगाई एयर इंडिया के लिए बोली

Anjali Thakur

Air India Sale: टाटा संस और स्पाइसजेट के अध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में एक समूह ने 15 सितंबर, 2021 को एयर इंडिया के लिए वित्तीय बोली लगाई है. हाल की मीडिया रिपोर्टों में यह कहा गया है कि, टाटा संस ने अपनी 100 प्रतिशत शाखा टैलेस प्राइवेट लिमिटेड और स्पाइसजेट के CEO अजय सिंह ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता और कुछ निवेश फंडों के साथ मिलकर ये बोलियां जमा की हैं.

एयर इंडिया के लिए कौन लगा रहा है बोली?

टाटा संस, जो विस्तारा का संचालन करती है और एयरएशिया इंडिया, एयर इंडिया की बिक्री के लिए बोली प्रक्रिया में सबसे आगे है. टाटा संस ने अपनी 100 प्रतिशत शाखा टैलेस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से अपनी बोलियां जमा की हैं. कंपनी के शेयरधारकों ने इस अधिग्रहण को वित्तपोषित करने और व्यवसायों में निवेश करने के लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से 40,000 करोड़ रुपये के फंड जुटाने के कार्यक्रम को अपनी मंजूरी दी थी.

टाटा समूह ने वर्ष, 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी जिसका नाम वर्ष, 1946 में एयर इंडिया रखा गया था. भारत सरकार ने वर्ष, 1953 में एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था.

स्पाइसजेट के CEO अजय अपनी निजी हैसियत से यह बोली लगा रहे हैं.

एयर इंडिया का निजीकरण: सफल बोली लगाने वाले को क्या मिलेगा?

एयर इंडिया की बिक्री से सफल बोली लगाने वाले को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतर्राष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट का नियंत्रण मिलेगा. विजेता बोली लगाने वाले को विदेशों में हवाईअड्डों पर 900 स्लॉट भी मिलेंगे.

सफल बोली लगाने वाले को कम लागत वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस का 100 प्रतिशत और एयर इंडिया SATS एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (AISATS) का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जोकि प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करता है.

अन्य संपत्तियां जैसे दिल्ली में एयरलाइंस हाउस, मुंबई में एयर इंडिया की इमारत, एयर इंडिया की सहायक कंपनियां जैसे एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (AITSL), और एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) सौदे का हिस्सा होंगी. बोली लगाने वाले को AI कर्मचारियों के लिए दिल्ली के कनॉट प्लेस, मुंबई, दिल्ली और अन्य शहरों में विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों में 04 एकड़ जमीन भी मिलेगी.

एयर इंडिया बिक्री: पृष्ठभूमि

वर्ष, 2018 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रयास किया था, लेकिन असफल रही. दो साल पहले घाटे में चल रहे इस नेशनल कैरियर में 26 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखने की कोशिश में सरकार एयर इंडिया के विनिवेश में एक बड़ी बाधा थी.

भारत सरकार वर्ष, 2021 में दो अन्य सहायक कंपनियों के साथ एयर इंडिया एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी: कम लागत वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया SATS एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (AISATS) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को तैयार है.

एयर इंडिया का कुल कर्ज 43,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें से 22,000 करोड़ रुपये एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (AIAHL) को हस्तांतरित किए जाएंगे और शेष सफल बोली लगाने वाले द्वारा वहन किया जाएगा. सफल बोलीदाता को एयरलाइन के हस्तांतरण से पहले सरकार AIAHL को हस्तांतरित राशि का वहन करेगी.  

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