एयर मार्शल आरकेएस भदौरिया ने संभाली भारतीय वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी

एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने 30 सितंबर 2019 को भारतीय वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया है. एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ का आज (30 सितंबर) अपने कार्यकाल के आखिरी दिन था. सेवानिवृत होने से पहले बीएस धनोआ दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे. उन्होंने यहां शहीद हुए जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये.

केंद्र सरकार ने एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया को वायु सेना का नया प्रमुख नामित किया था. आरकेएस भदौरिया एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ का स्थान लिए है. बीएस धनोआ 30 सितंबर 2019 को चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद से रिटायर हो गये हैं.  

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पासआउट आरकेएस भदौरिया के पास 4,250 घंटे उड़ान का अनुभव है. आरकेएस भदौरिया के पास 26 प्रकार के लड़ाकू और परिवहन विमान उड़ाने का अनुभव है. वे 15 जून 1980 को वायु सेना के लड़ाकू दस्ते में शामिल हुए थे.

भारतीय वायु सेना के नियमानुसार वे इस पद पर तीन साल तक या फिर 62 साल की आयु तक अपनी सेवाएं दे सकते हैं. हालांकि वे इस हिसाब से केवल दो साल तक ही इस पद पर बने रह पाएंगे.

आरकेएस भदौरिया के बारे में

• आरकेएस भदौरिया भारतीय वायुसेना के सबसे अच्छे पायलटों में से एक हैं.

• वे प्रायोगिक टेस्ट पायलट होने के साथ कैट 'ए' कैटेगरी के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर तथा पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं.

• वे हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) परियोजना पर राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र के परियोजना निदेशक तथा मुख्य प्रशिक्षक पायलट रह चुके हैं.

• वे एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट) के सह-प्रमुख, नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के कमांडेंट, सेंट्रल एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर तथा एयर स्टाफ के उपप्रमुख भी रहे हैं.

• उन्होंने 01 मई 2019 को भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख का कार्यभार संभाला था.

राफेल लड़ाकू विमान खरीद टीम के चेयरमैन

आरकेएस भदौरिया राफेल लड़ाकू विमान खरीद टीम के चेयरमैन भी रह चुके हैं. वे जल्द ही भारत को मिलने वाले लड़ाकू विमान राफेल को भी उड़ा चुके हैं. उन्होंने राफेल विमान उड़ाने के बाद कहा कि राफेल लड़ाकू विमान विश्व का सबसे अच्छा विमान है. राफेल विमान आने से भारतीय वायु सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

पुरस्कार और सम्मान

आरकेएस भदौरिया को अब तक के सेवाकाल में कई पदकों से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें जनवरी 2013 में ‘अति विशिष्ट सेवा’ पदक से सम्मानित किया गया था. उन्हें इससे पहले जनवरी 2002 में ‘वायु सेना पदक’ से सम्मानित किया गया था. जनवरी उन्हें साल 2018 में ‘परम विशिष्ट सेवा’ पदक से सम्मानित किया गया था.

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