एपीजे अब्दुल कलाम की आज 88वीं जयंती: जाने उनके जीवन से जुड़ी 10 मुख्य बातें

महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 15 अक्टूबर 2019 को 88वीं जयंती है. वे भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाते हैं. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती 15 अक्टूबर को पूरे भारत में मनाई जाती है. अब्दुल कलाम ने साल 1962 में इसरो से जुड़ने के बाद सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

अब्दुल कलाम ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी प्रसिद्ध है. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति तथा जाने माने वैज्ञानिक थे. अब्दुल कलाम को बच्चों से खास लगाव था. अपना पूरा जीवन उन्होंने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र को समर्पित कर दिया था. उन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक के रूप में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में काम किया था.

एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से जुड़ी दस मुख्य बातें

• एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था. उनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम (एपीजे अब्दुल कलाम) था.

• उन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने हेतु अख़बार तक बेचा थे. उन्होंने साल 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने जिसके बाद भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया था.

• भारत को बैलेस्टिक मिसाइल तथा लॉन्चिंग टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने के वजह से ही एपीजे अब्दुल कलाम का नाम मिसाइल मैन पड़ा था. उन्होंने भारत हेतु पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल, नाग, ब्रह्मोस समेत कई मिसाइल बनाईं.

• अब्दुल कलाम ने साल 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद दूसरी बार साल 1998 में भारत के पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी तथा राजनैतिक भूमिका निभाई. भारत को इस परीक्षण ने परमाणु ताकत बनाया था.

• वे साहित्य में भी खास रुचि रखते थे. उन्होंने कई कविताएं भी लिखीं थीं. उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था. उन्हें ‘भारत रत्न’ सम्मान साल 1997 में मिला था.

• अब्दुल कलाम का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था. गरीबी में जन्में अब्दुल कलाम रेलवे स्टेशन पर अखबार बेचा करते थे. लेकिन उन्होंने अपने हालातों के आगे कभी हिम्मत नहीं हारी और न ही सपनों को मरने दिया.

• कलाम आठ साल की उम्र से ही सुबह चार बचे उठते थे और नहाकर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहाकर जाने के पीछे मुख्य कारण यह था कि हरेक साल पांच बच्चों को फ्री में गणित पढ़ाने वाले उनके अध्यापक बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे.

• वे साल 1972 में इसरो से जुड़े. उनको परियोजना महानिदेशक के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एसएलवी तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ था. उन्होंने साल 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था.

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• उन्हें साल 2002 में भारत का राष्ट्रपति बनाया गया था. वहीं, वे पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद वापस शिक्षा, लेखन तथा सार्वजनिक सेवा में लौट आये थे. एपीजे अब्दुल कलाम पांच भाई एवं पांच बहन थे. इनके पिता नाविक थे तथा मछुआरों को किराये पर नाव दिया करते थे.

• अब्दुल कलाम का 27 जुलाई 2015 को शिलॉंग में निधन हो गया था. वे आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर देने गए थे. उनका इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.

एपीजे अब्दुल कलाम के मुख्य विचार:

एपीजे अब्दुल कलाम कहा करते थे की ‘सपने वो नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको नींद ही नहीं आने दें’. उनका दूसरा मुख्य विचार ‘अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले आपको सूरज की तरह तपना होगा’.

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