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आर्कटिक समुद्र के बर्फ में तेजी से गिरावट - अध्ययन

कनाडा के कैलगरी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण संकेतक आर्कटिक सागर के बर्फ  में तेज़ी से गिरावट आ सकता है, जो वैज्ञानिकों द्वारा की गयी पूर्वानुमान से कहीं अधिक है.
अध्ययन से पता चला है कि वर्षों से की गयी उपग्रह मापन ने आर्कटिक समुद्र के बर्फ की मोटाई को नमकीन बर्फ की वजह से 25% ज्यादा बढ़ा कर बताया है.
इसका अर्थ है कि 2050 तक आर्कटिक महासागर का बर्फ-मुक्त पूर्वानुमान गलत है और यह उस से कहीं पहले हो सकता है.
 
आर्कटिक बर्फ कवर के घटने का प्रभाव
 
बर्फ को कम करने से महासागरों के तापमान में वृद्धि होती है, और एशियाई मानसून को प्रभावित करने वाले एल नीनो जैसी मौसम की घटनाओं पर इसका असर पड़ता है.
यह बर्फीले जानवरों जैसे ध्रुवीय भालू और जीवों जैसे फ़्योप्लांक्टन के जीवित रहने के लिए मुश्किल हो सकता है।

पूर्वानुमान गलत क्यों?

यह अध्ययन उपग्रह से लिए गए सुचना और व्यापक क्षेत्र के मापन पर आधारित है. यह पाया गया कि नमकीन बर्फ (यह तब बनता है जब नमकीन को बर्फ की सतह से ऊपर से निकाल दिया जाता है) उपग्रहों से निकले रडार तरंगों को गुज़रने नहीं देता, और जिसके कारण माप गलत हो जाता है. और इस गलत माप के वजह से पूर्वानुमान गलत हो जाते हैं.
अब, वैज्ञानिकों ने बर्फ के खारापन में सुधार के कारकों को प्रस्तावित किया है जो समुद्री बर्फ के मोटाई के अनुमान में त्रुटि को कम कर सकता है.

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