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अरुणाचल प्रदेश बन सकता है भारत का प्रमुख वैनेडियम उत्पादक

अरुणाचल प्रदेश भारत का प्रमुख वैनेडियम उत्पादक राज्य बन सकता है. यह एक ऐसी उच्च-मूल्य की धातु है जिसका उपयोग स्टील और टाइटेनियम को मजबूत करने में किया जाता है. वैनेडियम के सबसे बड़े भंडार चीन में हैं, इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और रूस हैं.  

भले ही भारत वैनेडियम का एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता है, लेकिन अभी तक यह आवश्यक धातु का प्रमुख उत्पादक नहीं है. GSI के अधिकारियों के अनुसार, इस धातु को एक स्लैग से उप-उत्पाद के तौर पर  बरामद किया गया है जो कि वैनेडिफायर मैग्नेटाइट अयस्कों के प्रसंस्करण से एकत्र किया गया था.

वैनेडियम के बारे में

अपने शुद्ध रूप में, यह एक ग्रे, नरम और नमनीय तत्व है जो मुख्य रूप से खनन लौह अयस्क, स्टील स्लैग और फ़िलेलाइट्स से प्राप्त होता है. भारतीय खान ब्यूरो के अनुसार, भारत में वैनेडियम धातु का कुल अनुमानित भंडार 24.63 मिलियन टन है.

अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाने वाला वैनेडियम

राज्य के पापुम पारे जिले के तमांग और डेपो क्षेत्रों में वैलेडियम के संभावित भंडार को पैलियो-प्रोटेरोज़ोइक कार्बनलेस फाइटाइट चट्टानों में पाया गया. यह देश में वैनेडियम के प्रथम भंडार की पहली रिपोर्ट भी थी, जिसमें 0.76% वैनेडियम पेंटोक्साइड की औसत ग्रेड थी.

अरुणाचल प्रदेश में पाया जाने वाला यह खनिज पदार्थ भूगर्भीय रूप से पत्थर के कोयले के वैनेडियम डिपोजिट के समान है जो चीन में पाया जाता है. यह उच्च वैनेडियम तत्त्व 16% तक की निश्चित कार्बन तत्त्व के साथ ग्रेफाइट से जुड़ा हुआ है.

कैसे हुई यह खोज?

इस अन्वेषण के दौरान, भूवैज्ञानिकों ने डेपो क्षेत्र में 6 किमी से अधिक की लंबाई के साथ लगभग 7 मीटर मोटी कार्बनलेस फिलालाइट के दो बैंडों की खोज की थी. इन रिपोर्टों के अनुसार, 15.5 किमी की लंबाई और 7 मीटर की मोटाई के साथ इस धातु की अच्छी संभावनाएं लोअर सुबनसिरी जिले के सैया, डीड और फोप क्षेत्रों में पाई गईं. इस धातु के तत्त्व कारा डाडी में पर्लिन-संग्राम, पक्के-केसांग जिले, पश्चिम सियांग में कालामटी, सियांग जिले में काईंग और पश्चिम कामेंग में कलक्टांग में भी पाए गये हैं.

वैनेडियम का उपयोग और महत्वपूर्ण

वैनेडियम की वैश्विक मांग

एक GSI विशेषज्ञ के अनुसार, इसकी वैश्विक मांग आसमान छू रही है, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच वर्ष, 2017 में लगभग 17,300 मीट्रिक टन की कमी थी. यह खनिज पदार्थ राष्ट्रीय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है.

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