कृषि निर्यात नीति 2018 को कैबिनेट की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 दिसंबर 2018 को देश की पहली कृषि निर्यात नीति 2018 को मंजूरी प्रदान की. इस नीति का मकसद 2022 तक कृषि उत्पादों का निर्यात 60 अरब डॉलर करना है ताकि किसानों की आमदनी दोगुनी हो सके. फिलहाल 37 अरब डॉलर है.

इस नीति से लाभ:

कृषि निर्यात नीति व्यवस्था के माध्यम से किसानों को निर्यात के अवसरों का लाभ मिलेगा. इस नीति से अधिकतर जैविक और प्रसंस्कृत आहार के निर्यात पर अंकुश समाप्त हो जाएगा तथा कृषि उत्पादों के निर्यात के कई रास्ते खुलेंगे.

 

उद्देश्य:

कृषि निर्यात नीति का मकसद क्षेत्र से चाय, काफी, चावल व अन्य जिंसों के निर्यात को बढ़ावा देना है. इससे वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी. कैबिनेट के इस फैसले के बाद सरकार को विदेशी बाजारों में एक्सपोर्ट हिस्सेदारी को बढ़ाने में मदद मिलेगी.

 

मुख्य तथ्य:

•   इस नीति में ढांचागत सुविधाओं का आधुनिकीकरण, उत्पादों का मानकीकरण, नियमन को बेहतर बनाना, बिना सोचे फैसले फैसलों पर अंकुश और शोध एवं विकास गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है.

•   नीति के तहत जैविक उत्पादों के निर्यात पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया गया है. इस नीति के क्रियान्वयन में अनुमानित 1,400 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव होगा.

•   प्याज जैसे घरेलू जरूरतों के कुछ प्रमुख कृषि उत्पादों को छोड़कर सभी जैविक और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों से निर्यात प्रतिबंध हटा लिया जाएगा. इस नीति में कृषि निर्यात से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया गया है.

•   सरकार ने कृषि निर्यात दोगुना करने और भारतीय किसानों और कृषि उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रंखला से जोड़ने के मकसद से व्यापक कृषि निर्यात नीति बनाई है. इस नीति का मकसद अगले कुछ साल में 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करना है.

•   केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से किसानों के निशाने पर है. किसानों के प्रति सरकार के खिलाफ काफी रोष पनप रहा है. लेकिन नर्इ पॉलिसी आने के बाद किसानों को काफी राहत मिलने के आसार हैं.

 

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