मंत्रिमंडल ने विमान (संशोधन) विधेयक, 2019 को पेश करने की मंजूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विमान अधिनियम 1934 में संशोधन करने के लिए विमान (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है. अब इस विधेयक को संसद में पेश किया जायेगा. इस विधेयक से वायु क्षेत्र के नियमन को मजबूत किया जाएगा.

इस विधेयक में नियमों का उल्‍लंघन करने पर सजा दस लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये का करने का प्रावधान है. इस विधेयक में वर्तमान कानून का दायरा बढ़ाने का भी प्रावधान है. ये संशोधन अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे.

इस संशोधन विमान में हथियार, गोला-बारूद या खतरनाक सामान ले जाने या किसी भी तरह से विमान की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले व्यक्ति पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. इस संशोधित विधेयक को संसद में विमान (संशोधन) विधेयक 2019 के रूप में पेश किया जाएगा.

मुख्य बिंदु

• विमान संशोधन विधेयक अधिनियम के दायरे में हवाई नेविगेशन के लिए सभी क्षेत्रों के नियमों को लाने का प्रस्ताव किया गया है.

• संशोधन से अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आइसीएओ) की सुरक्षा संबंधी शर्ते भी पूरी होंगी.

• इसके अतिरिक्त इससे भारत के तीनो विमानन नियामकों-उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी( BCAS) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) को अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभाने में सहायता मिलेगी.

• नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा 16 जुलाई 2009 को प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, विमान अधिनियम में श्रेणी I के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दो साल की कैद या 10 लाख का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

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• इसमें विभिन्न अपराध शामिल हैं जैसे- बिना पंजीकरण के विमान उड़ाना, बिना वैधता के वैध प्रमाण पत्र के विमान उड़ाना, बिना उपयुक्त पायलट लाइसेंस के विमान उड़ाना इत्यादि.

इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्‍य दिवाला से संबंधित मामलों के निपटान के दौरान आने वाली समस्‍याओं को सुलझाने हेतु कानून में बदलाव लाना है जिससे कि उद्यमियों को अपना कारोबार चलाने में आसानी हो. इनसे वित्‍तीय संकट का सामना कर रहे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी.

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