सीएआईपीईईएक्स, बादलों में वर्षा के गठन एवं बादलों के प्रजनन हेतु प्रक्रिया

सीएआईपीईईएक्स: क्लाउड एयरोसोल इंटरेक्शन एवं वर्षा संवर्धन प्रयोग

सीएआईपीईईएक्स एक तकनीक एवं प्रक्रिया है जिससे बादलों के गठन की प्रक्रिया एवं उन्हें बनाया जाना शामिल है. कृत्रिम बारिश का यह तरीका उस समय मई 2016 में चर्चा में रहा जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री वाई एस चौधरी द्वारा सीएआईपीईईएक्स शब्द संसद में प्रयोग किया गया.

लोक सभा में 4 मई 2016 को मंत्री ने कहा कि भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) बादलों में वर्षा की प्रक्रिया एवं गठन को समझने के लिए इस कार्यक्रम द्वारा अनुसंधान कर रहा है.

सीएआईपीईईएक्स
•    इस अनुसंधान के तहत वायु के अवलोकन से बादलों के गठन एवं उसके प्रभाव को बताया गया.
•    इस कार्यक्रम में राडार, भूमि पर मौजूद अन्य उपकरण एवं वायु आधारित प्लेटफार्म उपयोग किये गये हैं. साथ ही इसमें उच्च संकल्प संख्यात्मक मॉडलिंग का भी उपयोग किया जायेगा.
•    बादलों के प्रजनन के लिए क्षेत्र को संवहनी क्षमता के आधार पर चुना गया.
•    बादलों को उपजाने से पहले अथवा उनके प्रजनन से पहले विमान द्वारा अवलोकन करना होगा एवं बाद में पर्यावरण की स्थिति एवं बीजारोपण की सामग्री का भी निरीक्षण करना होगा.
•    इन प्रक्रियाओं एवं अनुसंधान में एयरोसोल, क्लाउड ड्रॉपलेट्स, बारिश की बूंदे एवं बर्फ के नमूने आदि शामिल हैं.
•    अनुसंधान डाटा के अनुसार इस शोध से मौसम की भविष्यवाणी करने में भी सहायता मिलेगी.

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कृत्रिम बारिश का उपयोग सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बारिश कराने के लिए नहीं किया जा सकता. इसका उपयोग बादलों का घनत्व बढ़ाकर अथवा पहले से मौजूद बादलों में बारिश की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है.

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