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छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन को मंजूरी दी

छत्तीसगढ़ सरकार ने 18 जून 2018 को आठ वर्ष की सेवा पूरी करने वाले पंचायत एवं स्थानीय निकाय संवर्ग के शिक्षाकर्मियों के संविलियन को मंजूरी प्रदान कर दी है.

मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया.

फायदे:

इस फैसले से पंचायतों और नगरीय निकायों में कार्यरत करीब 1 लाख 50 हजार शिक्षाकर्मियों को लाभान्वित होने की उम्मीद है.

मुख्य तथ्य:

  • पहले चरण में आठ साल की सेवा पूरी करने वाले 1 जुलाई 2018 को 1 लाख 3 हजार शिक्षाकर्मियों का संविलियन होगा.
  • जुलाई 2019 में एक और आदेश निकलेगा, जिनसे 10 हजार शिक्षाकर्मियों को शिक्षक बनाया जाएगा.
  • इसके बाद के हर वर्ष एक जनवरी और एक जुलाई को संविलियन का आदेश जारी होगा. इन वर्षों में शेष 38 हजार शिक्षाकर्मियों को लाभ मिलना है.
  • इस फैसले से सरकार पर हर साल 1 हजार 346 करोड़ रुपए का वित्तीय भार पड़ेगा.
  • विलय के बाद शिक्षकों का वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 12,000 रुपये हो जाएगा.
  • संविलियन के बाद शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की भांति सातवें वेतन आयोग के समान वेतनमान, भत्ते साथ-साथ अन्य सुविधाएं जैसे- अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण आदि की प्रात्रता होगी.
  • संविलियन के बाद शिक्षकों का भविष्य में प्रधानपाठक एवं प्राचार्य के रिक्त पदों पर स्कूल शिक्षा विभाग पदोन्नति की व्यवस्था की जाएगी.
  • संविलियन किए गए शिक्षक, शिक्षा विभाग में शिक्षक( एलबी) संवर्ग के नाम से जाने जाएंगे एवं उनका नियंत्रण एवं प्रबंधन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा.
  • इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संभाग स्तर पर कार्यालय खोले जाएंगे.
  • राज्य एवं संभागीय कार्यालयों की सुविधा सुदृणीकरण किया जाएगा. भविष्य में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विषय विशेष के रिक्त पदों पर भर्ती की कार्यवाही की जाएगी.

                                                           शिक्षाकर्मी कौन हैं?

 

शिक्षाकर्मी पंचायत निकायों द्वारा मानदंड आधार पर नियुक्त शैक्षणिक श्रमिक/ शिक्षक हैं और वे स्कूलों में शिक्षकों का प्रमुख हिस्सा हैं.

                                                                  महत्व

मंत्रिपरिषद के फैसले के बाद भविष्य में स्कूल शिक्षा विभाग ही विषय विशेष के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्रवाई करेगा.

वर्तमान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग दोनों अपने-अपने स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी करते थे.

स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक शिक्षाकर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ 1 जुलाई 2018 से ही मिलेगा.

गौरतलब है कि तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 1994 में शिक्षकों के पद को डाइंग कैडर घोषित कर दिया था. राज्य निर्माण के बाद यह नियम छत्तीसगढ़ में भी लागू रहा है.

इस वजह स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की जगह शिक्षाकर्मियों की भर्ती शुरू की गई है.

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