चीन द्वारा दक्षिणी ध्रुव पर पहला स्थायी एयरपोर्ट बनाये जाने की घोषणा

चीन द्वारा हाल ही में यह घोषणा की गई कि वह दक्षिणी ध्रुव में देश के पहले स्थाई हवाई अड्डे का निर्माण करेगा. चीन का कहना है कि वह दक्षिणी ध्रुव जैसे ठंडे प्रदेश में एयरपोर्ट बनाने में सक्षम है.

यह हवाईअड्डा वैज्ञानिकों को साजो सामान उपलब्ध करायेगा और इससे संसाधन-संपन्न अंटार्कटिका में हवाईक्षेत्र प्रबंधन में सुधार होगा. आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है.

मुख्य बिंदु

•    चीन की सरकारी अखबार 'साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली' की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य के लिये चीन का 35वां अंटार्कटिक अभियान रवाना होगा, जिसका प्रमुख कार्य हवाईअड्डे का निर्माण करना होगा.

•    अंटार्कटिक में चीन निर्मित झोंगशान स्टेशन से 28 किलोमीटर दूर बर्फीले क्षेत्र के पास इस हवाईअड्डा के बनने की संभावना है.

•    चीनी वैज्ञानिकों ने 2009 में अंटार्कटिक में 25वें अभियान के दौरान फिक्स्ड विंग विमान के लिये चार किलोमीटर लंबी, 50 मीटर चौड़ी हवाईपट्टी का निर्माण किया था.

•    इस अभियान से चीन अब अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे उन देशों की जमात में शामिल हो रहा है जिनके अंटार्कटिक में हवाईअड्डे हैं.

•    यह स्थान सोना, चांदी, प्लेटिनम और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है. इससे पहले की आधिकारिक चीनी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2010 में बर्फीली परत पर चीन ने फीयिंग नामक हवाईअड्डे का निर्माण किया था.

लाभ

इस एयरपोर्ट पर मध्यम और बड़े विमान उड़ान भरने और उतरने में सक्षम होंगे. इससे परिवहन समय के साथ क्षमता में बढ़ोतरी होगी. विशेषज्ञों का हालांकि कहना है कि अंटार्कटिक में एयरपोर्ट बनाना आसान नहीं है क्योंकि वहां की 99.5 फीसद जमीन बर्फ से ढकी है.

 

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