पुस्तक ‘द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी’ का लोकार्पण किया गया

केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा नई दिल्ली में ‘द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी’ का लोकार्पण किया. इस पुस्तक को भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के साथ मिलकर तैयार किया गया है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पोती मनु गाँधी की डायरी के प्रथम खंड का गुजराती से अंग्रेजी में अनुवाद डॉ. त्रिदिप सुहृद ने किया है.

इस डायरी में गांधी जी की 1943 से 1944 के बीच की दिनचर्या दर्ज़ है. मनु गाँधी (मृदुला) महात्मा गाँधी के भतीजे जयसुखलाल अमृतलाल गाँधी की पुत्री थीं. वे 30 जनवरी, 1948 तक गांधीजी के साथ रही थीं. मनु कस्तूरबा के साथ आगा खान महल में भी रही थी.

मुख्य बिंदु

• राष्ट्रीय अभिलेखागार ने इस डायरी को महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती के मौके पर प्रकाशित किया है.
• इस डायरी में महात्मा गाँधी के जीवन के दुर्लभ पलों की जानकारी मिल सकेगी और आज़ादी की लड़ाई पर नया प्रकाश पड़ेगा.
• इस डायरी के पहले खंड में 1943-44 के कालखंड को कवर किया गया है इसमें मनु गाँधी तथा महात्मा गाँधी के जीवन का वर्णन है.
• यह पुस्तक गांधीवादी दर्शन और आधुनिक भारत के इतिहास का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए लाभदायक हो सकती है.

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार की शुरुआत कलकत्ता (अब कोलकाता) में मार्च 1891 में इंपीरियल रिकॉर्ड डिपार्टमेंट की स्थापना के साथ हुई थी. 1911 में जब राष्ट्रीय राजधानी को कलकत्ता से बदलकर नई दिल्ली किया गया उस समय इस अभिलेखागार को भी नई दिल्ली स्थानानांतरित कर दिया गया. इस विभाग को सन्‌ 1891 में ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से इकट्ठे हुए सरकारी अभिलेखों को लेकर रखने का काम सौंपा गया था. यह अभिलेखागार इस समय संसार के सबसे बड़े अभिलेखागारों में से एक है. इसके कार्यकलापों के प्रशासन, अभिलेख, प्रकाशन, प्राच्य अभिलेख और शैक्षणिक अभिलेख तथा परिरक्षण आदि नामों से छह विभाग हैं.

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