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रक्षा मंत्री ने विनय शील ओबेरॉय की अध्यक्षता में समिति गठित की

सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी और निगरानी के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक समिति के गठन को मंजूरी प्रदान की है. यह एक 13 सदस्यीय परामर्शी समिति होगी.

सरकार के पूर्व सचिव विनय शील ओबेराय इस समिति के अध्यक्ष होंगे. इनका कार्यकाल अगस्त 2018 तक रहेगा.

विनय शील समिति के बारे में


•    समिति के अन्य सदस्यों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन आरके त्यागी, आर्डिनेंस फैक्ट्रीज बोर्ड के पूर्व सदस्य आरके जैन, केपीएमजी के एयरोस्पेस के पार्टनर हेड और रक्षा डिवीजन के अंबर दुबे और अर्नस्ट एंड यंग के विशेष सलाहकार एलएलपी आर आनंद भी हैं.

•    रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस समिति पर स्वतंत्र रूप से समीक्षा करने की जिम्मेदारी है.

•    यह 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थिति की जांच करेगी.

•    समिति यह भी पता लगाएगी कि कहां बाधाएं आ रही हैं और देरी के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं.

•    समिति उन समस्याओं से निपटने के उपाय भी सुझाएगी जिनसे निपटने पर सेना को आधुनिकीकरण के लिए तैयार किया जा सकता है.

•    समिति परियोजनाओं की शुरुआती स्थिति रिपोर्ट मार्च तक रक्षा मंत्री को सौंप देगी.

•    इस रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल के अंत तक पहली और जुलाई के अंत तक दूसरी फॉलोअप रिपोर्ट सौंपी जाएगी.

पृष्ठभूमि

देश में सैन्य साजो-सामान की खरीद के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता है. 13वीं रक्षा योजना (2017-22) में पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरों और भारत के भू-रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए भारतीय सेनाओं ने सरकार से 26.84 लाख करोड़ रुपए आगामी पांच सालों के लिए मांगे हैं. इसके चलते रक्षा मंत्री ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए आश्वासन दिया था.

यह भी पढ़ें: गूगल पर 136 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया

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