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डॉ. ताहेरा कुतुबुद्दीन बनीं शेख जायद बुक पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय

Anjali Thakur

डॉ. ताहेरा कुतुबुद्दीन प्रतिष्ठित शेख जायद बुक पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं हैं. मुंबई में जन्मी इस प्रोफेसर ने अपनी पुस्तक 'अरबी ओरेशन: आर्ट एंड फंक्शन' के लिए यह सम्मान जीता है, जिसे वर्ष, 2019 में लीडन के ब्रिल एकेडमिक पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित किया गया था.

डॉ. ताहेरा एक अमेरिकी नागरिक हैं, जो भारत में प्रमुख कुतुबुद्दीन परिवार में पैदा हुईं और दक्षिण मुंबई में बड़ी हुईं. उन्हें इस महीने के अंत में अबू धाबी में पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

उन्हें 15 वें शेख जायद बुक अवार्ड की विजेता चुना गया है.

डॉ. ताहेरा कुतुबुद्दीन के बारे में

• डॉ. ताहेरा कुतुबुद्दीन शिकागो विश्वविद्यालय में NELC विभाग में अरबी साहित्य की प्रोफेसर हैं.
• उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा फोर्ट कॉन्वेंट, प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट इन कोडाइकनाल, विला थेरेसा हाई स्कूल और सोफिया कॉलेज मुंबई में पूरी की थी.
• अभी ये प्रोफेसर अबू धाबी की लाइब्रेरी ऑफ अरबी लिटरेचर के संपादकीय बोर्ड में भी कार्य करती हैं.
• उनका शोध शास्त्रीय अरबी कविता और गद्य में साहित्यिक, धार्मिक और राजनीतिक के विभिन्न विषयों पर केंद्रित है.

शेख जायद बुक अवार्ड के बारे में

• अबू धाबी सांस्कृतिक विभाग प्रतिवर्ष शेख जायद पुस्तक पुरस्कार के साथ अरबी साहित्य के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य करने के लिए लोगों (लेखकों और कवियों) को सम्मानित करता है.
• शेख जायद बुक पुरस्कार को अरबी दुनिया के नोबेल पुरस्कार के तौर पर जाना जाता है.
• इस पुरस्कार का उद्देश्य अरब दुनिया का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे शक्तिशाली, उत्तेजक और चुनौतीपूर्ण कार्यों का प्रदर्शन करना है.
• यह पुरस्कार "अरब लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रकाशकों और युवा प्रतिभाओं” को प्रदान किया जाता है जिनके लेखन और मानविकी के अनुवादों ने विद्वतापूर्ण और उद्देश्यपूर्ण तरीके से अरब सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है.
• यह पुरस्कार संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख वास्तुकार शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान की याद में शुरु किया गया था. शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान वर्ष, 1971-2004 तक अर्थात 30 वर्षों से अधिक समय तक अबू धाबी के आधिकारिक शासक और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति थे.
• यह पुरस्कार पहली बार वर्ष, 2007 में प्रदान किया गया था. यह दुनिया के सबसे अमीर साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है, क्योंकि इसमें डीएच 7,000,000 का नकद पुरस्कार दिया जाता है.

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