पोलियो प्रकोप के कारण पापुआ न्यू गिनी में आपातकाल घोषित

पापुआ न्यू गिनी में 18 साल बाद पोलियो का नया मामला सामने आया है. पापुआ न्यू गिनी को 18 साल पहले पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया था. पापुआ न्यू गिनी में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया गया है.

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मोरोब, मैडांग और ईस्टर्न हाईलैंड्स तीन प्रांतों में पोलियो के वायरस की पुष्टि की गई हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल में छह साल के बच्चे में पोलियो का वायरस पाया गया और इस तरह के संक्रमण के निशान समान समुदाय के स्वस्थ बच्चों में भी देखने को मिल रहे हैं.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पोलियो का कोई इलाज नहीं है और अपरिवर्तनीय पक्षाघात का कारण बन सकता है. पोलियो मुख्य रूप से उन बच्चों को प्रभावित करता है जो पांच वर्ष से कम आयु के हैं. इसे केवल बच्चों को एक से अधिक टीकाकरण खुराक देकर रोका जा सकता है.

स्वास्थ्य मंत्री पुका टेमू के अनुसार, देश में 13 महीने तक यह स्वास्थ्य आपातकाल रहेगा.

पापुआ न्यू गिनी में 1996 के बाद पोलियो का कोई भी मामला सामने नहीं आया था जिसके बाद डब्ल्यूएचओ के पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के बाकी हिस्सों में 2000 में पोलियो मुक्त के रूप में प्रमाणित किया गया था.

पोलियो से संबंधित मुख्य तथ्य:

•    पोलियोमेलाइटिस (पोलियो) मुख्यत: पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है. कम प्रतिरक्षण क्षमता वाले बजुर्गों को भी इसका खतरा रहता है.

•    पोलियो का कोई इलाज नहीं है. सही समय पर शिशु को पोलियो का टीका लगवा कर प्रतिरक्षित करना ही पोलियो को रोकने का सबसे कारगर तरीका है.

•    पोलियो संक्रमण के रोगियों में से सिर्फ 1% हीं फ्लेसीड पक्षाघात के शिकार होते हैं. शुरुआत में  मरीज को गैर विशिष्ट प्रोड्रोमल लक्षण हो सकते हैं जिनके बाद पक्षाघात के लक्षण उभरने लगते हैं.

•    संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1988 में विश्व को पोलियो मुक्त करने का अभियान आरंभ किया था.

•    पोलियो का वायरस मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है जो अंदर जाकर आंतों को प्रभावित करता है.

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