प्रख्यात लेखिका पद्मा सचदेव को वर्ष 2015 का प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान प्रदान किया

जम्मू की कवि और उपन्यास लेखिका पद्मा सचदेवा को 29 अगस्त 2016 को प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान प्रदान किया गया. उन्हें डोगरी भाषा में अपनी जीवनी ‘चित्त-चेते’ लिखने के लिए 2015 का सरस्वती पुरस्कार दिया गया है. उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा नई दिल्ली में उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

76 वर्षीय लेखिका की जीवनी 2007 में प्रकाशित हुई थी और इसे 2005 से 2014 के बीच विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित 22 पुस्तकों में से चुना गया.
सचदेव के अनुसार दुनिया खूबसूरत शब्दों से भरी हुई है जिनसे कहानी बनती है.

पद्मा सचदेव के बारे में-

• पद्मा सचदेव का जन्म जम्मू में हुआ. वह डोगरी भाषा की पहली आधुनिक महिला कवि है.

• उन्होंने अनेकों कविता संग्रह प्रकाशित किए. उनके प्रकाशन मेरी कविता मेरे गीत ने 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी जीता है.

• मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनकी कविता के लिए उन्हें वर्ष 2001 में भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री और 2007-2008 में कबीर सम्मान से सम्मानित किया गया.

• उन्होंने गुजराती और पंजाबी सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में 60 किताबें लिखी और कविताएं सुनाई.

सरस्वती सम्मान पुरस्कार-

• यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारत के संविधान की अनुसूची आठवीं में सूचीबद्ध 22 भारतीय भाषाओं में से किसी में उत्कृष्ट साहित्यिक कार्य 10 वर्षों के दौरान प्रकाशित करने हेतु किसी एक भारतीय नागरिक को प्रदान किया जाता है.

• पुरस्कार स्वरुप एक प्रशस्ति पत्र और पट्टिका के अलावा 15 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाती है.

• इस पुरस्कार का नाम देवी सरस्वती, जो विद्या (सीखने) की भारतीय देवी है, के के नाम पर है.

• भारत में इसे सबसे ज्यादा साहित्यिक पुरस्कारों में से एक माना जाता है।.

• पुरस्कार को 1991 में के के बिड़ला फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया.

• सर्वप्रथम यह पुरस्कार हरिवंशराय 'बच्चन' को उनकी आत्मकथा के चार संस्करण क्या बोलूं क्या याद करूं, नीदा का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक हेतु प्रदान किया गया.

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