लुप्तप्राय हंपबैक डॉल्फिन के एक समूह को बांद्रा-वर्ली समुद्री लिंक के समीप देखा गया

हाल ही में शोधकर्ताओं द्वारा महाराष्ट्र के बांद्रा-वर्ली समुद्री लिंक के समीप लुप्तप्राय हंपबैक डॉल्फ़िन (Humpback Dolphins) के एक समूह को देखा गया. सामान्य तौर पर हंपबैक डॉल्फिन महाराष्ट्र के रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग क्षेत्रों से सटे तटीय इलाके में देखी जाती हैं.

यह माना जा रहा है कि मुंबई के समुद्री तट के नज़दीक पिछले कुछ समय से डॉल्फिन का आवागमन बढ़ा है. इससे पूर्व वर्सोवा और मध जेट्टी के पास भी हंपबैक डॉल्फिन देखी गई थी.

हंपबैक डॉल्फ़िन के बारे में जानकारी

•    हंपबैंक डॉल्फ़िन सामान्य तौर पर उथले एवं तटीय जल में निवास करती हैं. यह अधिकांशतः भूरे रंग की होती है.

•    हंपबैक डॉल्फ़िन पश्चिम और पूर्वी अफ्रीका, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के आस-पास के महासागरों में पाई जाती हैं.

•    युवावस्था में ये काले या गहरे भूरे रंग की होती हैं और फिर जैसे-जैसे इनकी उम्र बढ़ती जाती है इनका रंग हल्का भूरा होता जाता है.

•    हंपबैक डॉल्फ़िन मध्यम से छोटे आकार की डॉल्फ़िन होती हैं. यह श्वास लेने के लिए बार-बार पानी की सतह पर आती हैं.

•    अन्य डॉल्फिन की तरह यह भी आम तौर पर समूहों में रहती हैं.

•    डॉल्फिन को भारत में विलुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया है तथा इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I  के तहत संरक्षण प्राप्त है.

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972

•    सरकार ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 को देश के वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करने एवं अवैध शिकार, तस्करी और अवैध व्यापार को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया था.

•    जनवरी 2003 में अधिनियम में संशोधन किया गया था और सजा और अधिनियम के तहत अपराधों के लिए जुर्माना और अधिक कठोर बना दिया है.

•    जनवरी 2003 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया था और इसके तहत अपराधों के लिए जुर्माने और सजा को अधिक कठोर बना दिया गया है.

•    मंत्रालय ने इस कानून को मजबूती देने के लिए और अधिक कठोर उपायों को इसमें शामिल कर इसमें संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है.

 

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