Advertisement

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में शामिल किया

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने 27 जून 2018 को पाकिस्तान को एक बार फिर 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा है.

पाकिस्तान ने अपने वित्त मंत्री शमशाद अख्तर को देश के बचाव के लिए चुना है. अख्तर एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान का पक्ष रखेंगे और ग्रे सूची से नाम हटाने की मांग करेंगे. इसके साथ ही पाक वित्त मंत्री मनी लॉन्ड्रिंग,आतंकी फंडिंग और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एफएटीएफ को जानकारी देंगे.

पाकिस्तान ने एफएटीएफ द्वारा ब्लैक लिस्ट में डाले जाने से बचने के लिए 28 सूत्री योजना लागू करने का ऐलान किया है. इसके तहत उसने आईएस, अलकायदा, लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, जमात उद दावा (जेयूडी) एवं इसकी सहयोगी फलाह ए इंसानियत और तालिबान से संबद्धित व्यक्तियों को वित्तीय मदद रोकने का प्रस्ताव दिया है.

इससे पहले पाकिस्तान का नेतृत्व कर रहे अख्तर ने अपने देश को ग्रे सूची से हटाने के लिए एफएटीएफ से आग्रह किया था लेकिन बावजूद इसके पेरिस में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकी समूहों को फंडिंग करने वाले देशों की सूची में शामिल कर दिया.

इस लिस्ट में पहले भी शामिल:

गौरतलब है कि आतंकवाद को आर्थिक मदद देने के चलते पाकिस्तान वर्ष 2012 से वर्ष 2015 तक एफएटीएफ के 'ग्रे लिस्ट' में शामिल रह चुका है.

पाकिस्तान को हो सकता है बड़ा नुकसान:

  • ग्रे सूची पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकती है. इससे पाकिस्तान को काफी नुकसान हो सकता है.
  • एफएटीएफ की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में शामिल होने के बाद किसी देश को इंटरनेशनल संस्थाओं द्वारा कर्ज मिलने में काफी परेशानी होती है.
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों के लिए पाकिस्तान में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा.
  • पाकिस्तान उद्योगपति भी अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए वैश्विक बाजार से पूंजी नहीं उठा पाएंगे.

37 देशों में से 36 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन:

पेरिस में हुई अंतर-सरकारी निकाय एफएटीएफ की बैठक में शामिल 37 देशों में से 36 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया. जबकि एकमात्र तुर्की पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आया. पाकिस्तान को निगरानी सूची में डालने के प्रस्ताव को अमेरिका ने पेश किया था.

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ):

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) एक अंतर - सरकारी निकाय है जिसका गठन धनशोधन, आतंकवादियों के वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को किसी तरह के अन्य खतरे से मुकाबले के लिए किया गया था.
  • एफएटीएफ का गठन वर्ष 1989 में किया गया था.
  • इसमें 37 स्थायी सदस्य हैं. इजरायल और सऊदी अरब पर्यवेक्षक की भूमिका में हैं.
  • यह धन को अवैध तरीके से एक देश से दूसरे देश भेजने, आतंकवाद को आर्थिक मदद देने और वैश्विक आर्थिक ढांचे के लिए अन्य खतरनाक तरीकों पर नजर रखता है.
  • संगठन द्वारा लिया गया फैसला सदस्‍य देशों के लिए बाध्‍यकारी होता है.
यह भी पढ़ें: पोलियो प्रकोप के कारण पापुआ न्यू गिनी में आपातकाल घोषित
 
Advertisement

Related Categories

Advertisement