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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने प्रत्यायन पर चौथे विश्व सम्मेलन का शुभारंभ किया

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 08 सितंबर 2018 को प्रत्यायन पर चौथे विश्व सम्मेलन (WOSA-2018) का नई दिल्ली में उद्घाटन किया. इस अवसर पर बोलते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि ‘योग्यता निर्धारण एवं विभागक्रम प्रतिष्ठा’ दोनों किसी भी शैक्षणिक संस्थान की गुणवत्ता कसौटी होते हैं इसलिये प्रत्यायन महत्वपूर्ण हो जाता है.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा की यह दो वजहों से हो सकता है, पहला यह कि कुछ संस्थान प्रत्यायन के अंतर्गत आना नहीं चाहते एवं दूसरा यह कि स्वयं हमारी प्रत्यायन की प्रणाली में कुछ प्रतिबंध हैं इसलिये सरकार राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) की क्षमता में बढ़ोतरी करना चाहती है ताकि और अधिक संस्थानों को प्रत्यायित किया जा सके.

संस्थानों को 'रैंकिंग और रेटिंग' की आवश्यकता क्यों है?

संस्थानों में अच्छे प्रदर्शन के लिये रैंकिंग एवं रेटिंग प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं.

उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय सांस्थानिक रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के कारण प्रत्येक संस्थान ने अपनी रैंकिंग में वृद्धि के लिये एक आंतरिक समिति का गठन किया है.

छात्र प्रवेश से पूर्व संस्थानों की रैंकिंग भी देखते हैं.

प्रत्यायन पर वैश्विक सम्मेलन (WOSA):

एनबीए द्वारा नई दिल्ली में 7 सितंबर से 9 सितंबर तक प्रत्यायन पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया गया था.

WOSA 2018 का विषय ‘परिणाम-आधारित प्रत्यायन के समक्ष चुनौतियां एवं अवसर’ था.

निम्न उप-विषयों पर पेपर आमंत्रित किये गए थे:-

  • अचीविंग एक्सीलेंस थ्रू लर्निंग आउटकम्स
  • रोल ऑफ इण्डस्ट्री इन टेक्नीकल एज्यूकेशन
  • रैंकिंग एण्ड रेटिंग ऑफ हायर एज्यूकेशन इन्स्टीट्यूशंस- डू दे हेव ए रोल इन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट?
  • लिंकिंग गवर्नमेंट फण्डिंग विद क्वालिटी
  • यूज़ ऑफ आईसीटी इन एक्रेडिटेशन इन लार्ज ज्यूरिस्डिक्शंस

उद्देश्य:

WOSA 2018 अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोगों एवं उद्योग के लिये अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने हेतु भविष्य में की जाने वाली साझेदारियों के मंच ढूंढने का एवं विश्व भर में छात्रों व पेशेवरों की आवाजाही की सुविधा प्रदान करने के लिये खुली वार्ता का वातावरण तैयार करने का अवसर है. इसमें हिस्सा लेने वाले साझीदार वर्तमान में जारी वैश्विक प्रत्यायन प्रक्रियाओं की बेहतर समझ प्राप्त करेंगे.

शैक्षिक संस्थानों के पास विश्व भर से उद्योगों, नीति-निर्माताओं एवं प्रत्यायन एजेंसियों से बातचीत करने एवं उनके दृष्टिकोण को सीखने का अवसर होगा.

महत्व:

उद्योग बेहतर जनबल एवं प्रत्यायन मानकों पर अपनी ज़रूरतों पर विचार साझा करने के लिये शिक्षण संस्थानों एवं प्रत्यायन प्रदान करने वाली एजेंसियों से बातचीत कर पाएंगे.

विश्व भर से प्रत्यायन एजेंसियां सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं वनज़रिए पर एवं प्रत्यायन के बारे में अपनी समझ पर मंच साझा कर पाएंगी. नीति निर्माता एवं नियमन संस्थान खूबियों एवं कमियों के साथ साथ विभिन्न देशों में कार्यरत शैक्षणिक प्रणालियों कीगहराई से समझ विकसित कर पाएंगे.

राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए):

राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत प्रत्यायन के माध्यम से भारत में पेशेवर एवं तकनीकी संस्थानों द्वारा चलाये जाने वाले कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में रत एक स्वायत्त संस्थान है.

एनबीए को जून 2014 से वॉशिंगटन समझौते के स्थायी हस्ताक्षरकर्ता का दर्जा प्रदान किया गया है.

इसने यह सुनिश्चित करने के लिये कि स्वयं द्वारा प्रत्यायित कार्यक्रमों में स्नातक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं प्रासंगिक हों, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वित परिणाम-आधारित मूल्यांकन एवं प्रत्यायन अपनाए हैं.

पृष्ठभूमि:

प्रत्यायन पर वैश्विक सम्मेलन (WOSA)एनबीए द्वारा दो वर्ष में एक बार आयोजित किया जाने वाला सम्मेलन है जो प्रत्यायन के विषय परभागीदारों को अपने ज्ञान एवं सूचनाओं को साझा करने का मंच प्रदान करता है.

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