जर्मनी ने दुनिया की पहली सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैम का सफल परीक्षण किया

जर्मनी ने हाल ही में दुनिया की पहली सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैम का सफल परीक्षण किया. यह ट्रैम एलआईडीएआर टेक्नोलॉजी, कैमरा सेंसर्स और कई रडार से लैस है.

यह ट्रैम जर्मनी के बर्लिन में आयोजित होने वाली पहली इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट एक्जीबिशन में हिस्सा लेगा.

ट्रैम से संबंधित मुख्य तथ्य:

•   यह ट्रैम इंसानों के मुकाबले अधिक तेज़ी से ट्रैकसाइड सिग्नल और संभावित खतरों की पहचान करने में सक्षम है.

•   इसका परीक्षण वास्तविक यातायात परिस्थितियों में 6 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सेफ्टी ड्राइवर के साथ किया गया था.

•   ये ट्रॉम राडार और कैमरा सेंसर से लैस है.

•   साथ ही यह ट्रैम एआई एल्गोरिदम पर बेस्ड है जो ट्रैकसाइड सिग्नल पर सिग्नल देती है और पैदल चलने वालों और वाहनों को पार करने जैसे खतरों को पहले ही बता देती है.

•   हालांकि, इमरजेंसी कंडीशन के लिए एक सुरक्षा चालक के साथ इसे वास्तविक यातायात में 6 किमी के परीक्षण मार्ग पर चलाया गया है.

•   इसमें एक बार में 250 यात्री यात्रा कर सकते है.

50 वैज्ञानिकों की टीम ने विकसित किया:

दुनिया की इस पहली चालकरहित ट्रैम को 50 कंप्यूटर वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, गणितज्ञों की एक टीम ने विकसित किया है. न्यूरेमबर्ग आपरेटिंग कंपनी ने कहा कि हमने इस ट्रॉम का परीक्षण चुपचाप किया क्योंकि हमें डर था कि लोगों को इसके बारे में पता चला तो वो इसमें चढ़ेगें जिससे अव्यवस्था फैल सकती थी.

नौकरियों में कटौती नहीं होगी:

इस परियोजना के मैनेजर ओलिवर ग्लेसर ने कहा की हमारी मुख्य प्राथमिकता सुरक्षा है, जिसमें 420 कर्मचारी हैं और सालाना 33 मिलियन यात्रियों की सुरक्षा है. इससे नौकरी में कटौती नहीं होगी.

जर्मनी का कहना है कि दुनिया में इस तरह की और भी तकनीक हैं पर उनकी यह तकनीक सबसे अलग है. यह ट्रॉम उन्ही ट्रैक्स पर चलेगी जिन पर अन्य ड्रायवर ट्रॉम चलाते हैं.

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