वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट-2019 जारी

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आइएफपीआरआइ) ने हाल ही में वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट-2019 जारी की. रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक आर्थिक विकास बीते साल तेजी से आगे बढ़ा लेकिन यह खाद्य संकट की समस्या को कम करने में मददगार साबित नहीं हुआ.

रिपोर्ट के अनुसार भूख और कुपोषण, गरीबी, सीमित आर्थिक अवसर तथा पर्यावरण क्षरण के कारण विश्व के कई हिस्सों में ग्रामीण क्षेत्र संकट की स्थिति से गुज़र रहे हैं.

मुख्य बिंदु:

•   रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व की कुल आबादी में 45.3 प्रतिशत ग्रामीण आबादी है और विश्व की कम-से-कम 70 प्रतिशत आबादी बहुत ही गरीब है.

•   विश्व भर में साल 2012 से साल 2017 के बीच कुपोषण के कारण बच्चों के कद न बढ़ने के मामलों में नौ प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी लेकिन इसके बावजूद ऐसे बच्चों की संख्या 15 करोड़ है, जो बहुत अधिक है। बच्चों के कद न बढ़ने के मामले और पोषण के अन्य संकेतकों से पता चलता है कि सतत विकास लक्ष्य की पूर्ति का रास्ता बेहद दुर्गम है.

•   ग्रामीण आबादी तीव्र जनसंख्या वृद्धि दर, अपर्याप्त रोजगार और उद्यम निर्माण, खराब बुनियादी ढाँचा तथा अपर्याप्त वित्तीय सेवाओं के कारण पीड़ित है.

•   विश्व भर में लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण युवाओं के पास कोई औपचारिक रोज़गार नहीं है, वे या तो बेरोज़गार हैं या अस्थायी रोज़गार में लगे हैं.

•   रिपोर्ट के अनुसार, नव-प्रवर्तनशील और समग्र पुनरुद्धार के बिना नए अवसरों का लाभ उठाने और बढ़ती चुनौतियों का सामना करने हेतु साल 2030 तक सभी के लिये खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना मुश्किल होगा.

•   रिपोर्ट में भारत सरकार के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इसका लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोबारा सशक्त करके ढांचागत बदलाव लाना है.

•   रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बदलते उपभोग पैटर्न ने शहरीकरण, जनसांख्यिकीय बदलाव, आय में वृद्धि और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं तथा खाद्य प्रणालियों के बढ़ते एकीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोज़गार के नए अवसर प्रदान किये हैं.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु: एक नजर

•   भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने एवं बुनियादी सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाकर ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने के कई उपाय किये गए हैं.

•   कुछ वर्षों में देश में प्रमुख फसलों हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य उनके उत्पादन लागत का 1.5 गुना अधिक किया गया है.

•   भारत में 22,000 ग्रामीण बाजार को ग्रामीण कृषि बाज़ार से जोड़ने तथा कृषि विपणन बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने की योजना बनाई गई है.

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