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सरकार ने कारीगरों की मजदूरी 36 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने को मंजूरी प्रदान की

केंद्रीय, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा रखे गये प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है. इस प्रस्ताव में केवीआईसी ने 36 प्रतिशत तक मजदूरी बढ़ाने के लिए कहा था.

इस मंजूरी से कारीगरों की मजदूरी 5.50 रुपये प्रति लच्छे से बढ़कर 7.50 रुपये प्रति लच्छा हो जाएगी. खादी उद्योग में कार्यरत कारीगरों के लिए यह प्रस्ताव काफी लाभदायक होगा.

सरकारी सब्सिडी संशोधित बाजार विकास सहायता (एमएमडीए) के भुगतान के साथ खादी स्पिनरों को मजदूरी में वृद्धि के लिए यह प्रस्ताव 15 अगस्त, 2018 से लागू माना जाएगा.

मुख्य तथ्य

•    एमएमडीए कार्यक्रम के तहत खादी संस्थानों को उत्पादन सब्सिडी के रूप में 30 प्रतिशत प्रधान लागत का भुगतान किया जाता है.

•    इस 30 प्रतिशत में से 40 प्रतिशत मजदूरी प्रोत्साहन के रूप में कारीगरों के पास जाते हंि और शेष 60 प्रतिशत खादी संस्थानों में जाते हैं.

•    मजदूरी प्रोत्साहनों का भुगतान खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से सीधे कारीगरों के खातों के लिए किया जाता है.

उदहारण

यदि एक कारीगर एक दिन में 20 लच्छों पर काम करता है तो उसे 7.50 रुपये प्रति लच्छे के हिसाब से प्रतिदिन 150 रुपये प्राप्त होंगे. इसके अतिरिक्त उसे एमएमडीए द्वारा इंसेंटिव भी दिया जायेगा जो कि 150 रुपये का 35 प्रतिशत अर्थात् 52 रुपये होगा. इस प्रकार एक कारीगर जो 20 लच्छे तैयार करता है, वह प्रतिदिन 202 रुपये कमा सकता है. वर्तमान समय में प्रत्येक कारीगर एक दिन में 20 से अधिक लच्छों पर काम करता है.


महत्व
कारीगरों की मजदूरी में वृद्धि से इस पेशे की ओर अधिक से अधिक युवाओं के जुड़ने की संभावना है. इस बढ़ोतरी से खादी के प्रति युवाओं की सोच बदलेगी. साथ ही, इस क्षेत्र में अधिक लोगों के जुड़ने से खादी उद्योग में भी तेजी आ सकती है.

 

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