केंद्र सरकार ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया

केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2018 को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की समीक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम समीक्षा समिति का गठन किया है. सशक्त आर्थिक आधारभूत ढांचे की आवश्यकता के लिए संबधित अधिनियम को समकालीन बनाने के उद्देश्य से प्रतिस्पर्धा अधिनियम समीक्षा समिति का गठन किया है.

प्रतिस्पर्धा अधिनियम वर्ष 2002 में पारित हुआ था, लेकिन भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने वर्ष 2009 में पूरी तरह से काम करना शुरू किया.

गत 9 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हुई है और आज भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है और इसके और प्रगति करने की आशा है.

प्रतिस्पर्धा अधिनियम को सशक्त करने और नागरिकों को सर्वश्रेष्ठ नियमों द्वारा उनके द्वारा दिए गए मूल्यों के अनुरूप गुणवत्ता को प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम को सशक्त करने की आवश्यकता है.

समिति का गठन:

प्रतिस्पर्धा अधिनियम को सशक्त करने और नागरिकों को सर्वश्रेष्ठ नियमों और मूल्यों के अनुरूप बदलाव करने की आवश्यकता है. इसके लिये अधिनियम की समीक्षा के लिये कॉरपोरेट मामलों के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है. यह समिति अपनी पहली बैठक की तिथि से तीन महीने के भीतर अपना कार्य पूर्ण करेगी और रिपोर्ट देगी.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग भारत की एक विनियामक संस्था है. इसका उद्देश्य स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढावा देना है ताकि बाजार उपभोक्ताओं के हित का साधन बनाया जा सके.

समीक्षा समिति के सदस्य:

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के अध्यक्षों को इसका सदस्य बनाया गया है. इसके अलावा मैसर्स खेतान एंड कंपनी के हैग्रिव खेतान, आईकेडीएचवीएजे एडवाईजर्स एलएलपी के हर्ष वर्धन सिंह, मैसर्स शार्दुल अमरचंद्र मंगलदास एंड कंपनी की पल्लवी शार्दुल, एएससीआईआई के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. एस.चक्रवर्ती तथा दिल्ली स्कूल ऑफ इकानमिक्स के प्रो. आदित्य भट्टाचार्य को सदस्य बनाया गया है. कार्पोरट मामलों के संयुक्त सचिव( प्रतिस्पर्धा) समिति के सदस्य सचिव होंगे.

समिति के संदर्भ की शर्तें:

•    यह समिति बदलते हुए व्यापारिक वातावरण के अनुरूप प्रतिस्पर्धा अधिनियम, नियम और नियमावली की समीक्षा करेगी और आवश्यकता होने पर अपेक्षित बदलाव के सुझाव देगी.

•   प्रतिस्पर्धा क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ अंतराष्ट्रीय कार्यप्रणाली का अध्ययन करना और इसमे विशेष तौर पर साख विरोधी कानून, विलय दिशा-निर्देश और सीमा व्यापार प्रतिस्पर्धा मुद्दे सम्मिलित हैं.

•   प्रतिस्पर्धा अधिनियम के साथ परस्पर व्याप्त अन्य नियामक व्यवस्था/संस्थागत प्रक्रिया/सरकारी नीतियो का अध्ययन करना हैं.

•   आयोग देश में प्रतिस्पर्धा के विकास और बाजार के मामलों को देखता है.

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