भारत ने विश्व बैंक के साथ नेशनल बायोफार्मा मिशन हेतु कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर किया

केंद्र सरकार ने हाल ही में नेशनल बायोफार्मा मिशन के तहत बायोफर्मास्यूटिकल्स के शुरुआती विकास की दिशा में अनुसंधान को तेज करने के लिए वित्तपोषण व्यवस्था के लिए विश्व बैंक के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए है.

नेशनल बायोफार्मा मिशन को पांच साल की अवधि के लिए 250 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत से मंजूरी दे दी गई है.


उद्देश्य:

•    इसका मुख्य उद्देश्य भारत को नवीन, किफायती और प्रभावी बायोफर्मास्यूटिकल उत्पादों के डिजाइन और विकास का एक केंद्र बनाना है.

•    अकादमिक शोधकर्ताओं की क्षमता को मजबूत करना, उत्पाद विकास के प्रारंभिक चरणों के दौरान लागत और जोखिम को कम करके जैव उद्यमियों और एसएमई को सशक्त बनाना तथा उद्योग के नवाचार को बढावा देना इसका उद्देश्य है.

इसके वित्त पोषण में विश्व बैंक 50 प्रतिशत ऋण प्रदान करेगा. इस कानूनी समझौते का निष्पादन बीआईआरएसी, आर्थिक मामलों के विभाग और पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (वर्ल्ड बैंक की एक शाखा) की ओर से किया गया.

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत आने वाले जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा नेशनल बायोफार्मा मिशन लागू किया जा रहा है.

 

पृष्ठभूमि:

भारत फार्मास्यूीटिकल उद्योग में काफी सक्रिय रहा है और जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण और ज़रूरतमंदों के लिये कम कीमत वाले फार्मास्यू टिकल उत्पाजदों में भारत का वैश्विक स्तनर पर अहम योगदान रहा है. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बायोफार्मास्यूटिकल्स उद्योग में इससे बड़ा बदलाव आएगा. इससे उद्यमिता और स्व देशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये आवश्यबक परितंत्र का भी निर्माण होगा.

 
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