केंद्र सरकार ने तीन वर्षों के लिए 2,500 मेगावॉट की ऊर्जा खरीद की पायलट योजना शुरू की

केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2018 को मध्यम अवधि के अंतर्गत तीन वर्षों के लिए कुल 2,500 मेगावॉट की ऊर्जा खरीद की पायलट योजना को शुरू किया हैं. यह योजना उन विद्युत उत्पादकों के लिए है जिनकी परियोजनाएं प्रारंभ हो चुकी है, परन्तु उनके साथ ऊर्जा खरीद समझौता नहीं किया गया है.

उद्देश्य:

इस योजना का मुख्य उद्देश्य कमीशन बिजली संयंत्रों को पुनर्जीवित करना है जो वैध बिजली खरीद समझौते (पीपीए) के बिना बिजली बेचने में असमर्थ हैं.

योजना से संबंधित मुख्य तथ्य:

  • इस योजना के तहत, इन संयंत्र को बिजली आपूर्ति के लिए बोली लगाने की अनुमति दी जाएगी. इसके तहत, जेनरेटर से मध्यम अवधि के तहत कमीशन परियोजनाओं के साथ बिजली खरीद समझौते के बिना बिजली खरीदी जाएगी.
  • पीटीसी इंडिया, ऊर्जा खरीद के लिए सफल निविदाकर्ताओं के साथ तीन वर्षों (मध्यम अवधि) का ऊर्जा खरीद समझौता और विद्युत वितरण कंपनियों के साथ विद्युत आपूर्ति का समझौता करेगी.
  • पायलट योजना के तहत, एक इकाई को 600 मेगावाट की अधिकतम क्षमता आवंटित की जा सकती है.
  • यह योजना, समझौता क्षमता के 55 प्रतिशत खरीद का आश्वासन देती है। तीन वर्षों के लिए ऊर्जा की दर निश्चित रहेगी और इसमें कोई वृद्धि नहीं की जाएगी.
  • पीएफसी कंस्लटिंग लिमिटेड (पीएफसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) को नोडल एजेंसी तथा पीटीसी इंडिया लिमिटेड को एग्रीगेटर नियुक्त किया गया है.
  • पीएफसी कंस्लटिंग लिमिटेड इस योजना के अंतर्गत मई 2018 के प्रथम सप्ताह तक निविदा आमंत्रित करेगी. निविदा की प्रक्रिया डीईईपी ई-बिडिंग पोर्टल पर संचालित की जाएगी.

यह भी पढ़ें: दिल्ली विश्व का छठा सर्वाधिक प्रदूषित शहर: डब्ल्यूएचओ

यह योजना ऊर्जा मांग को पुनर्जीवित करेगी. ऊर्जा की मांग में कमी ने उन बिजली उत्पादकों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है जिनके साथ ऊर्जा खरीद समझौता नहीं किया गया है. यह योजना लगभग 12 जीडब्ल्यू कमीशन थर्मल पावर प्लांटों को मध्यम अवधि के बिजली खरीद समझौते (पीपीए) प्राप्त करने में मदद करेगी जो कि कोयला लिंकेज हेतु आवश्यक है.

 

Related Categories

Popular

View More