केंद्र सरकार ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को भंग कर दिया. इसके लिए अध्यादेश लाया गया, जिसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 26 सितंबर 2018 को मंजूरी दे दी.

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के संसद से पास होने तक सात सदस्यीय कमेटी एमसीआई का कामकाज देखेगी. डॉ. वी.के. पॉल को इसका चेयरमैन बनाया गया है.

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स

•    बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में सात लोग शामिल हैं जो कि अपने कार्यक्षेत्र में प्रसिद्ध हैं.

•    डॉक्टर वी के पॉल जो कि नीति आयोग के मेंबर हैं और काउंसिल के चेयरमैन के रूप में कार्य संभालेंगे.

•    बोर्ड ऑफ गवनर्स के दूसरे सदस्य डॉक्टर रणदीप गुलेरिया हैं जो कि एम्स के महानिदेशक पद पर तैनात है.

•    तीसरे सदस्य का नाम डॉक्टर जगत राम है जो पीजीआई चंडीगढ़ में डायरेक्टर हैं.

•    चौथे सदस्य डॉक्टर बी एन गंगाधर हैं जबकि पांचवे सदस्य डॉक्टर निखिल टंडन हैं. डॉक्टर गंगाधर निमहंस बैंगलोर के डायरेक्टर हैं जबकि डॉक्टर निखिल टंडन एम्स में इंडोक्राइनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म के विख्यात प्रोफेसर हैं.

•    छठे सदस्य का नाम डॉक्टर एस वेंकटेश है जो डायरेक्टर जेनरल हेल्थ पद पर कार्यरत हैं. सातवें सदस्य डॉ बलराम भार्गव हैं. वे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल हैं.

पृष्ठभूमि

वर्ष 2016 में संसदीय कमेटी स्वास्थ्य की रिपोर्ट पर स्वर्गीय रंजीत रॉय चौधरी की अध्यक्षता में नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल तैयार किया गया जिसे लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को रखा गया.  इस बिल में अंडर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट की संख्या को बढ़ाने पर जोर दिया गया साथ ही मेडिकल एजुकेशन में सुधार करने पर भी पूरा बल दिया गया. ड्राफ्ट में चार बोर्ड बनाने की बात कही गई जिसके सद्स्य की इंटिग्रीटी और प्रोफेशनलिज्म बेहतरीन हो इस पर जोर दिया गया.

 

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