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सामरिक भागीदारी मॉडल लागू करने संबंधी दिशा निर्देशों को मंजूरी दी गई

सरकार ने अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के निर्माण में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाये गये सामरिक भागीदारी मॉडल को लागू करने से संबंधित दिशा निर्देशों को मंजूरी प्रदान की है.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 30 जुलाई 2018 को रक्षा खरीद परिषद की बैठक हुई जिसमें इन दिशा निर्देशों को मंजूरी दी गयी. इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तो बढ़ेगी ही सशस्त्र सेनाओं को समय पर हथियारों की आपूर्ति भी की जा सकेगी. परिषद ने प्रक्रिया की शुरूआत करते हुए नौसेना के बहुउपयोगी हेलिकॉप्टर की खरीद से संबंधित दिशा-निर्देशों को भी मंजूरी दी है.

रक्षा मंत्रालय ने सामरिक भागीदारी मॉडल के तहत शुरू में लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों, पनडुब्बी और बख्तरबंद वाहनों जैसे टैंक आदि बनाने की मंजूरी दी है. गौरतलब है कि सरकार ने सामरिक भागीदारी मॉडल को पिछले वर्ष ही मंजूर किया था.

दिशा-निर्देशों से संबंधित प्रमुख बिंदु

•    सामरिक भागीदारी मॉडल के तहत सभी खरीद के लिए विशेष रूप से गठित अधिकार प्राप्त समिति की मंजूरी लेनी होगी.

•    यह समिति परियोजनाओं के समय से पूरे होने पर ध्यान देगी. दिशा निर्देशों में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वेदशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है.

•    भारतीय साझीदारों के साथ मिलकर भारत को सैन्य प्लेटफार्म का हब बनाने में सहयोग करने वाली वैश्विक कंपनियों को भी प्रोत्साहित किया जायेगा.

•    इससे रक्षा क्षेत्र में सरकार की मेक इन इंडिया पहल को भी मजबूती मिलेगी.

रक्षा खरीद परिषद

केंद्र सरकार द्वारा 11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा खरीद परिषद की स्थापना की गई. रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी.

 

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