पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने 20 सितम्बर 2020 को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने सुबह उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सदस्यता की शपथ ली. राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उन्हें शपथ समारोह में शपथ दिलाई और उच्च सदन में उनका स्वागत किया.

राज्यसभा के सभापति एम नायडू ने कहा कि इस सदन की अच्छी परंपरा रही है और पूर्व प्रधानमंत्री तथा देश के वरिष्ठतम नेता इस सदन के सदस्य बने हैं. विभिन्न दलों के सदस्यों ने भी देवगौड़ा का सदन में स्वागत किया. एचडी गौड़ा को 13 जून को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया.

एचडी गौड़ा के बारे में

•    एचडी गौड़ा ने साल 1994 से साल 1996 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया. वे साल 1996 के आम चुनावों के बाद संयुक्त मोर्चा सरकार का नेतृत्व करने वाले देश के 11वें प्रधानमंत्री बने.

•    एचडी देवगौड़ा का जन्म 18 मई 1933 में कर्नाटक के हासन जिले के हरदनहल्ली गांव में हुआ था.

•    एचडी देवगौड़ा भारत के 11वें प्रधानमंत्री रह चुके हैं वे 01 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे.

•    एचडी देवगौड़ा जनता दल सेक्युलर के अध्यक्ष हैं. सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद देवगौड़ा ने राजनिति का रुख किया और केवल 20 वर्ष की उम्र में राजनीति में आ गए.

•    उन्होंने कांग्रेस के साथ अपनी राजनीति की शुरुआत की. भारत के प्रधानमंत्री रहने के अलावा देवगौड़ा कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. वे 11 दिसंबर 1994 को कर्नाटक के 14वें मुख्यमंत्री चुने गए थे.

•    एचडी देवगौड़ा की पत्नी का नाम चेन्नम्मा है उनके 4 बेटे और 2 बेटियां हैं.

निर्वाचित हुए थे देवगौड़ा

जून माह में चुनाव मैदान में कोई और प्रत्याशी न होने के कारण जनता दल (एस.) के मुखिया एचडी देवगौड़ा, कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और भाजपा के दोनी कार्यकर्ता अशोक गस्ती और इरन्ना कडाडी राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे. इन लोगों  ने राज्यसभा में जनता दल (एस) कूपेंद्र रेड्डी, कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद व राजीव गौड़ा और भाजपा के प्रभाकर कोरे का स्थान लिया है.

इन लोगों का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो गया था. उल्लेखनीय है कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव 19 जून 2020 को होना था लेकिन किसी और के चुनाव मैदान में न उतरने से इन चारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया.

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