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एशियाई खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: विस्तृत विश्लेषण

इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित किये गये 18वें एशियाई खेलों के समापन होने तक भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 69 मेडल हासिल किये जिसमें 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 29 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं.
14वें दिन ब्रिज प्रतियोगिता में भारत के प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने गोल्ड मेडल जीतते ही इतिहास बना दिया. इन दोनों खिलाड़ियों ने न सिर्फ़ इस गेम में भारत के लिए पहला गोल्ड जीता बल्कि एशियाई खेलों में भारत के गोल्ड मेडलों की संख्या 15 की.

एशियाई खेलों में भारत का प्रदर्शन

भारत ने उन खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन किया जिनमें भारत अब तक विशेष पहचान नहीं बना सका है. एक ज़माना था जब कहा जाता था कि भारत में क्रिकेट के अतिरिक्त किस और खेल के लिए जगह नहीं है. एथलेटिक्स खेलों को भारतीयों के लायक नहीं समझा जाता था लेकिन 18वें एशियाई खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने इस भ्रम को भी दूर किया है.

•    हेप्टाथलॉन में स्वप्ना बर्मन ने देश को पहली बार गोल्ड मेडल दिलाया.

•    ट्रिपल जम्प में अपरिंदर सिंह द्वारा 50 वर्ष बाद गोल्ड मेडल जीता गया.

•    पीवी सिंधू एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं.

•    विनेश फोगाट पहली भारतीय महिला कुश्ती खिलाड़ी रहीं जिन्होंने एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता.

•    नीरज चोपड़ा भाला फेंक प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने.

•    फवाद मिर्ज़ा घुड़सवारी में 1982 के बाद मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने.

•    एथलेटिक्स में भारत ने 7 गोल्ड मेडल जीते हैं जबकि 10 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल भी अर्जित किये हैं.


पृष्ठभूमि

जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदकों के मामले में भारत ने वर्ष 1951 के रिकॉर्ड की बराबरी की है. पदकों की कुल संख्या के आधार पर भी भारत ने इन खेलों के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड बनाया है. पिछले एशियाई गेम्स (2014) में भारत 57 पदक ही जीत पाया था, जिनमें 11 स्वर्ण पदक थे. भारत दक्षिण कोरिया के इंचियोन में हुए खेलों में आठवें नंबर पर रहा था.

किस खेल में कितने मेडल?

खेल

गोल्ड

सिल्वर

ब्रॉन्ज

कुल

एथलेटिक्स

7

10

2

19

शूटिंग

2

4

3

9

कुश्ती

2

 -

1

3

ब्रिज

1

 -

2

3

रोइंग

1

 -

2

3

टेनिस

1

 -

2

3

बॉक्सिंग

1

 -

1

3

तीरंदाजी

 -

2

 -

2

एकुएसट्रियन  

 -

2

 -

2

स्क्वैश

 -

1

4

5

नौकायन

 -

1

2

3

बैडमिंटन

 -

1

1

2

हॉकी

 -

1

1

2

कबड्डी

 -

1

1

2

कुराश

 -

1

1

2

वुशु

 -

 -

4

4

टेबल टेनिस

 -

 -

2

2

सेपक्ताक्राव

 -

 -

1

1


अच्छे प्रदर्शन का कारण और सरकार की खेल योजनाएं

भारतीय खिलाड़ियों द्वारा 18वें एशियाई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने का श्रेय न केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत तैयारियों को जाता है बल्कि सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं से मिलने वाले लाभ को भी जाता है. केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई खेलो इंडिया योजना, अखिल भारतीय छात्रवृत्ति योजना, टारगेट ओलंपिक पोडियम तथा राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज कार्यक्रम योजनाओं से भी खिलाड़ियों की प्रतिभा निखर कर सामने आई है.

खेलो इंडिया कार्यक्रम:
भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए खेलों इंडिया कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है. पूर्व सरकारों द्वारा संचालित राजीव गांधी खेल अभियान, शहरी खेल विकास कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना को मिलाकर इसे तैयार किया गया है. इस योजना के अंतर्गत देश में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष चुनिंदा खेलों में 1000 प्रतिभावान खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. योजना के अंतर्गत चुने गए प्रत्येक खिलाड़ी को 1 वर्ष में 5 लाख रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. इसका उद्देश्य खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रतिवर्ष प्रतिभावान खिलाड़ियों को लंबे समय तक विकास का मार्ग उपलब्ध कराया जाना है.

टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना: केंद्र सरकार ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) शुरू की है. इस योजना में खिलाड़ियों के चयन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी पूर्व खिलाड़ियों और लंबे समय से खेल प्रशासन से जुड़े लोगों को दी गई है. इस योजना को लागू करने के लिए आठ सदस्यीय पैनल का भी गठन किया गया है. यह योजना वर्ष 2020 तक आयोजित होने वाले सभी महत्वपूर्ण खेल आयोजनों तक लागू रहेगी. आठ सदस्यीय पैनल विभिन्न खेलों के 75 से 100 खिलाड़ियों के पूल का चयन करेगा. चयनित खिलाड़ियों को अगले दो ओलंपिक खेलों में 25 से 30 मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा. इस योजना के अंतर्गत सबसे ज्यादा ध्यान एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी और निशानेबाजी के साथ-साथ उन खेलों पर भी होगा जिनमें भारतीय खिलाड़ियों के पदक जीतने की सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं.

राष्ट्रीय खेल विकास कोष: केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खेल विकास कोष का गठन देश में खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. इसके अंतर्गत प्रवासी भारतीयों और निजी-कार्पोरेट क्षेत्र सहित सरकारी और गैर-सरकारी सभी स्रोतों से पैसा जुटाया जाता है. कोष में सहायता करने को आकर्षक बनाने के लिए अंशदान की राशि को आयकर से शत प्रतिशत छूट दी जाती है. राष्ट्रीय खेल विकास कोष में प्राप्त धनराशि का उपयोग खेल-कूद को सामान्य रूप से बढ़ावा देने के साथ-साथ ख़ास खेलों और कुछ विशिष्ट खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता हासिल करने में किया जाता है.

राष्ट्रीय खेल विश्विद्यालय: वर्ष 2014-15 के बजट भाषण में राष्ट्रीय खेल विश्विद्यालय की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए, पश्चिम इम्फाल जिले के कोउतुक में 325.90 एकड़ जमीन चिह्न्ति की है. यह राष्ट्रीय खेल विश्विद्यालय अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पहला पूर्ण खेल विश्विद्यालय होगा. इस विश्विद्यालय का लक्ष्य खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रबंधन और खेल कोचिंग के क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देना है.

 

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