भारत और अफगानिस्तान ने शैक्षिक बुनियादी ढांचे के विकास हेतु 5 समझौता ज्ञापनों पर किये हस्ताक्षर

भारत और अफगानिस्तान ने 5 जुलाई 2020 को 5 समझौता ज्ञापन (MOUs) पर हस्ताक्षर किए हैं. अफगानिस्तान के 4 प्रांतों फराह, नूरिस्तान, कपिसा, बदख़्शान में शैक्षिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इन दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

इन 5 MOUs पर भारतीय राजदूत विनय कुमार के साथ अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल तवाब बलकारजई, अफगान अर्थव्यवस्था मंत्री मुस्तफा मस्तूर और उप शिक्षा मंत्री अब्दुल सुभान रऊफ ने हस्ताक्षर किए हैं.

भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत सरकार अफगानिस्तान के लोगों और वहां की सरकार की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर भारत-अफगानिस्तान विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

पांच समझौता ज्ञापनों के तहत शामिल विभिन्न परियोजनाएं

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 5 हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के तहत शामिल सभी परियोजनाएं उच्च शिक्षा भवन के निर्माण, कक्षाओं के निर्माण और एल्बिरोनी विश्वविद्यालय परिसर के भीतर सड़क के निर्माण से संबंधित हैं जो फराह, बदख़्शान, नूरिस्तान और कपिसा सहित देश भर में फैली हुई हैं.

अफगानिस्तान की विभिन्न परियोजनाओं के लिए भारत सरकार का वित्तीय समर्थन

भारतीय दूतावास ने एक आधिकारिक बयान में यह बताया है कि, भारत और अफगानिस्तान ने हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (HICDP) के तहत 5 MoUs पर हस्ताक्षर के माध्यम से अपनी विकास साझेदारी को और मजबूत किया है जोकि भारत सरकार द्वारा अफगानिस्तान के इस्लामिक गणराज्य में लागू की गई थीं.

वर्ष 2005 से, भारत सरकार ने हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (HICDP) के तहत पूरे अफ़गानिस्तान में 550 से अधिक परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए 200 मिलियन अमरीकी डॉलर का भुगतान किया है. हमारे दूतावास के अनुसार, इनमें से 400 से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाएं अपने कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं.

वर्ष 2001 से, अफगानिस्तान में भारत द्वारा 3 बिलियन अमरीकी डॉलर की परियोजनायें शुरू की गई हैं. इनमें वर्ष 2016 में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि भी शामिल है, जो ‘न्यू डेवलपमेंट पार्टनरशिप’ योजना के तहत अफगानिस्तान को एकजुट, शांतिपूर्ण, बहुलतावादी और समृद्ध राष्ट्र के रूप में उभरने में मदद करने की प्रतिबद्धता के तहत 5 साल से अधिक की अवधि के लिए प्रदान की जायेगी.

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