भारत और चीन ने पहली बार सुरक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये

भारत और चीन ने 22 अक्टूबर 2018 को आतंकवाद से मिलकर निपटने पर सहमति जताते हुए एक सुरक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. भारत और चीन के बीच पहली बार सुरक्षा सहयोग पर समझौता हुआ.

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में चीन के स्टेट काउंसिलर एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री झाओ केझी के साथ भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. चीनी मंत्री 21 से 25 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर हैं.

समझौता का उद्देश्य:

इस समझौता का मकसद आतंकवाद, संगठित अपराध, नशीली पदार्थों पर लगाम और ऐसे अन्य क्षेत्रों पर चर्चा, सहयोग करना और इन पर लगाम लगाना है.

बैठक के दौरान:

बैठक के दौरान भारत और चीन ने आपसी हित के मुद्दों पर भी चर्चा की. इसमें सबसे पहले द्विपक्षीय आतंकवाद मुद्दे पर वार्ता हुई. दोनों ही देशों ने भारत और चीन के बीच सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में हुए समझौते का स्वागत किया.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का मुद्दा भी उठाया. भारत ने मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियो की सूची में शामिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव किया है लेकिन चीन बार बार इसका विरोध करता रहा है.

आतंकवाद से निपटने में सहयोग:

बाद में दोनों मंत्रियों ने सुरक्षा सहयोग को और बढाने के समझौते पर हस्ताक्षर किये. इससे आतंकवाद से निपटने , संगठित अपराधों , मादक पदार्थ नियंत्रण और अन्य संबंधित क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढेगा. कुछ साल पहले सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन कुछ साल पहले उसकी वैधता खत्म हो गई थी.

आतंकी घोषित:

वार्ता के दौरान भारत ने चीन से कहा कि वह पाकिस्तान स्थित जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने में सहयोग करे. चीन हर बार इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र में भारत के आवेदन पर वीटो कर देता है.

भारत और चीन के बीच सहमति:

भारत और चीन के बीच मानव और ड्रग्स तस्करी, साइबर क्राइम, वित्तीय अपराध पर चर्चा हुई, जबकि अलग-अलग एजेंसियों से सहयोग पर भी समझौते हुए हैं.

भारत और चीन ने आतंक को लेकर अपनी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं. इस पर काम करने को लेकर सहमति बनी है. दोनों देशों के बीच आतंकवाद पर काबू पाने सहित सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

भारतीय सेना और चीन की पीपल्स लीबरेशन आर्मी के बीच दो महीने तक भारत-भूटान और चीन के तिहरे जंक्शन डोकलाम में चले गतिरोध के एक साल बाद यह कदम उठाया जा रहा है.

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