भारत ने मालदीव को कोविड-19 संकट से निपटने हेतु 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता दी

भारत ने कोरोना (कोविड-19) महामारी के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने में मदद हेतु मालदीव को 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है. यह जानकारी भारतीय दूतावास ने 20 सितम्बर 2020 को दी. यह सहायता मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की कठिन आर्थिक स्थिति से पार पाने में मदद के आग्रह के बाद दी गयी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने 21 सितम्बर 2020 को कहा कि एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य और आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के एक ट्वीट के जवाब में कही.

मालदीव के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने उनके देश की वित्तीय सहायता करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया था. राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने कहा कि मालदीव को जब भी दोस्त की जरूरत महसूस हुई है भारत ने हमेशा उसकी मदद की है. 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता के रूप में सदाशयता और पड़ोसी होने की भावना दिखाने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और वहां की जनता का तहेदिल से शुक्रिया करता हूं.

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति सोलिह, आपकी भावनाओं का हम आदर करते हैं. एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य और आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे.

Appreciate your warm sentiments, President @ibusolih! As close friends and neighbours, India and Maldives will continue to support each other in our fight against the health and economic impact of COVID-19. https://t.co/esNRBWJxZg

— Narendra Modi (@narendramodi) September 21, 2020

ट्रेजरी बिल की अवधि दस साल

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक के दौरान वित्तीय सहायता की घोषणा की गयी थी. यह सहायता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), माले को ट्रेजरी बांड की बिक्री के जरिये उपलब्ध करायी गयी. भुगतान को लेकर ट्रेजरी बिल की अवधि दस साल है.

मालदीव को लेकर भारत तत्पर

भारत ने कोवड-19 महामारी के दौरान निरंतर मालदीव को सहायता उपलब्ध करायी है. कोविड-19 महामरी से निपटने को लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों का एक दल मार्च में मालदीव गया था. अप्रैल में 5.5 टन जरूरी दवाओं की खेप दी गयी. वहीं 6.2 टन दवाएं और 580 टन खाद्य पदार्थ मई में भारतीय वायु सेना ने पहुंचाये. मालदीव सरकर के आग्रह पर भारत वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने हेतु अल्प अवधि के लिये अनुबंध के आधार पर नियुक्त किये गये डॉक्टरों और नर्सों को भेजेगा. मालदीव के राजस्व में पर्यटन की एक तिहाई हिस्सेदारी है. कोविड-19 संकट के कारण पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है.

भारत और मालदीव के बीच संबंध

भारत और मालदीव के बीच दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं. प्राचीन समय में मालदीव पर भारतीय हिंदू संस्कृति का अत्यधिक प्रभाव रहा है. मालदीव को ब्रिटिशों से 26 जुलाई 1965 में आजादी मिली थी. भारत मालदीव को एक सम्प्रभु राष्ट्र के रूप में सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक है. भारत अनेक योजनाओं के तहत मालदीव के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करता है.

भारत और मालदीव ने वर्ष 1981 में एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये थे जो आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान करता है. दोनों देशों की निकटता और हवाई संपर्क में सुधार के कारण पर्यटन तथा व्यापार के लिये मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में वृद्धि हुई है. दोनों देशों का लंबा सांस्कृतिक इतिहास रहा है और इन संबंधों को और मज़बूत करने के लिये निरंतर प्रयास जारी है.

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