भारत को वायु प्रदूषण से हर साल 10.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान: रिपोर्ट

भारत को वाहनों में प्रयोग होने वाले जीवाश्म ईंधन जनित वायु प्रदूषण से विभिन्न रूपों में लगभग 10.7 लाख करोड़ रुपये का सालाना आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संस्था ग्रीनपीस की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में जीवाश्म ईंधन के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुये बताया गया है कि जीवाश्म ईंधन जनित वायु प्रदूषण की कीमत, पूरी दुनिया को विभिन्न रूपों में चुकानी पड़ रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वायु प्रदूषण के कारण प्रत्येक साल 10 लाख लोगों की मौत हो रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदूषण के कारण चीन को सालाना 64 लाख लाख करोड़, अमेरिका को 42 लाख करोड़ और भारत को 10.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. चीन और अमेरिका के बाद भारत, इस नुकसान का सामना कर रहा तीसरा सबसे बड़ा देश है.

वायु प्रदूषण पर डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि प्रत्येक साल विश्वभर में जीवाश्म ईंधन को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की चपेट में आने से 45 लाख लोगों की मौत होती है. चीन में 18 लाख तथा भारत में 10 लाख लोगों की मौत के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार होता है. रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मौतें हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों के कैंसर और तीव्र श्वसन संक्रमण के कारण होती हैं.

हर साल 12.85 लाख बच्चे अस्थमा से पीड़ित

रिपोर्ट के मुताबिक वाहनों से होने वाले प्रदूषण से उत्पन्न नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (NO2) बच्चों में अस्थमा की वजह बन रहा है. प्रत्येक साल 12.85 लाख बच्चे अस्थमा से पीड़ित होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र पर होने वाल कुल व्यय जीडीपी का लगभग 1.28 फीसदी है जबकि जीवाश्म ईंधन को जलाने से भारत को जीडीपी का लगभग 5.4 फीसदी नुकसान उठाना पड़ता है.

पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र हेतु 69,000 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि नाइट्रोजन डाईऑक्साइड से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है. वायु प्रदूषण आज के समय में बहुत ही गंभीर समस्या है. वायु प्रदूषण रसायनों, सूक्ष्म पदार्थ, मानव की भूमिका है, जो मानव को या अन्य जीव जंतुओं को या पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है.

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