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भारत और नेपाल ने रक्सौल-काठमांडू रेलवे लाइन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये

भारत और नेपाल ने 31 अगस्त 2018 को दोनों देशों के बीच रणनीतिक महत्व के रक्सौल-काठमांडो रेलमार्ग को विकसित करने के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यह रेलमार्ग बिहार के रक्सौल शहर को नेपाल की राजधानी काठमांडो से जोड़ेगा.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाली प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के बाद इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये. हालांकि, इस रेल लाइन के लिए अप्रैल 2018 में ही करार किया गया था. तब नेपाल के पीएम भारत दौरे पर आए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुलाकात की. दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने समेत द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़ी सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा भी की.

                                                  महत्व:

इस रेलवे लाइन से लोगों को आवाजाही में आसानी होगी और बड़ी मात्रा में वस्तुओं के परिवहन के लिए भी यह रेल लाइन उपयोगी सिद्ध होगी. इस रेलवे लाइन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों व विकास को बढ़ावा मिलेगा.

 

मुख्य तथ्य:

•    यह समझौता रक्सौल (भारत) और काठमांडो (नेपाल) के बीच ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के आरंभिक इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वेक्षण के लिए किया गया है.

•    इस रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य भारत की कंपनी कोंकण रेल कार्पोशन करेगा.

•    इसके बाद प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग और क्रियान्वयन योजना इत्यादि का प्रबंध किया जायेगा.

•    इसके अलावा इन दो देशों के बीच तीन और रेलवे परियोजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. यह परियोजनाएं नौतनवा-भैरहवा, न्यू जलपाईगुड़ी-काकरभित्ता और नेपालगंज रोड-नेपालगंज हैं.

•    रक्सौल-काठमांडो रेलमार्ग से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा और थोक में सामान की आवाजाही सरल हो सकेगी.

पृष्ठभूमि

यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दो साल पहले ही चीन ने तिब्बत से नेपाल के बीच रेलमार्ग स्थापित करने पर सहमति जतायी थी. इसके अलावा चीन ने नेपाल के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए तीन हाईवे का निर्माण करने का निर्णय किया है, इनका निर्माण वर्ष 2020 तक कर लिया जायेगा.

भारत-नेपाल सम्बन्ध:

भारत और नेपाल के सम्बन्ध अनादि काल से हैं. दोनों पड़ोसी हैं, दोनों की धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषायी एवं ऐतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है. नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री के. पी. ओली नें प्रधानमंत्री पद संभालकर सबसे पहले भारत का दौरा किया. उनके इस दौरे से दोनों देशों के बीच सम्बन्ध और भी मजबूत हुए हैं.

भारत-नेपाल संबंधों की शुरुआत वर्ष 1950 की मैत्री और शांति संधि के साथ हुई थी. यही संधि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गठजोड़ को भी बढ़ाती रही. भारत-नेपाल के मध्य मधुर एवं सहयोगात्मक संबंध रहे है. नेपाल के राजनीतिक संक्रमण काल के दौरान भारत ने वृहद स्तर पर इसकी सहायता की. मोदी सरकार ने पिछले तीन साल में नेपाल सहित अन्य सभी सार्क देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किये हैं.

यह भी पढ़ें: भारत ने नेपाल के तराई क्षेत्र में सड़क निर्माण हेतु 470 मिलियन रुपये की सहायता राशि जारी की

 

 
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