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भारत ने आधिकारिक तौर पर तकनीकी मंदी की दर्ज, वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में GDP में 7.5 प्रतिशत की गिरावट

27 नवंबर, 2020 को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में भारतीय अर्थव्यवस्था मने 7.5 प्रतिशत तक गिरावट हुई. इस संकुचन के साथ, भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर तकनीकी मंदी दर्ज की है.

यह संकुचन वित्त वर्ष 2020-21 की पहले तिमाही से एक प्रतिक्षेप है. अप्रैल से जून तिमाही (पहली तिमाही, वित्त वर्ष 2020-21) में भारत की अर्थव्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जिसने 40 वर्षों में सबसे अधिक पहला संकुचन दर्शाया था क्योंकि कोविड -19 महामारी ने उपभोक्ता मांग और निजी निवेश को प्रमुख रूप से प्रभावित किया.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अनुसार, सकल मूल्य वर्धित (GVA) वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही के दौरान शून्य से भी 07 प्रतिशत नीचे आ गया था.

मुख्य विवरण

इन सेक्टरों ने वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में वृद्धि दर्शाई

कुछ क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में फिर से विकास शुरू हुआ, क्योंकि बिजली, पानी की आपूर्ति, गैस और अन्य उपयोगिता सेवाओं में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

कृषि, मछली उद्योग और वानिकी सहित अन्य क्षेत्रों में भी 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और विनिर्माण क्षेत्र में 0.6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई.

पृष्ठभूमि

कोविड - 19 महामारी से पहले से ही भारतीय अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो रही थी, पिछले वित्त वर्ष में यह केवल 4.2 प्रतिशत थी जोकि पिछले 11 वर्षों में सबसे धीमी गति है.

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