भारत और यूएई ने मुद्रा अदला-बदली समझौता किया

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने परस्पर मुद्रा अदला-बदली की व्यवस्था समेत दो समझौतों पर 04 दिसंबर 2018 को हस्ताक्षर किये है.

भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और यूएई के विदेशी मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद अल नहयान के साथ व्यापक चर्चा के बाद ये समझौते किये गये.

दो दिवसीय यात्रा पर 03 दिसंबर 2018 को यूएई आयी स्वराज का यूएई-भारत संयुक्त आयोग की बैठक (जेसीएम) से पहले यूएई के विदेश मंत्री ने गर्मजोशी से स्वागत किया. व्यापक रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाते हुए विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद अल नहयान ने 12वें भारत-यूएई जेसीएम की सह-अध्यक्षता की. आर्थिक और तकनीकी सहयोग के लिए भारत-यूएई संयुक्त आयोग का यह 12वां सत्र है.

 

समझौते से संबंधित मुख्य तथ्य:

एक समझौते में दोनों देशों ने सहमति बनाई है कि वे आपसी व्यापार में डॉलर के बजाय एक-दूसरे की मुद्रा में ही भुगतान कर पाएंगे. करेंसी स्वैप (अपनी मुद्राओं की अदला-बदली) को लेकर हुए इस समझौते से भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कच्चा तेल कम दामों में खरीदने में मदद मिलने की उम्मीद है.

दोनों नेताओं ने व्यापार, सुरक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया. दूसरे समझौते से दोनों पक्ष अफ्रीका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा सकेंगे.

 

द्विपक्षीय व्यापार:

दोनों देश बड़े व्यापार भागीदार हैं और दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 50 अरब डालर है. भारत में होने वाले तेल आयात का यूएई छठा सबसे बड़ा स्रोत है. दो देशों के बीच मुद्रा अदला-बदली समझौता संबंधित देश को अपनी मुद्रा में कारोबार और आयात तथा निर्यात कारोबार के लिये अमेरिकी डालर जैसे तीसरे मानक मुद्रा को बीच में लाये बिना पूर्व निर्धारित विनिमय दर पर भुगतान की अनुमति देता है.

 

अन्य जानकारी:     

यूएई के विदेश मंत्री के साथ स्वराज महात्मा गांधी के 150वीं जयंती समारोह और आधुनिक यूएई के संस्थापक शेख जायेद की जयंती के शताब्दी समारोह के मौके पर अबु धाबी में गांधी-जायेद डिजिटल संग्रहालय का भी उद्घाटन करेंगी. वह अबु धाबी में भारतीय समुदाय से भी आमने-सामने होंगी.

 

करेंसी अदला-बदली क्या है?

करेंसी अदला-बदली (करेंसी स्वैप) एक ऐसा समझौता है जो दोनों देशों को अपनी मुद्रा में व्यापार की इजाजत देगा. इसके अतिरिक्त दोनों आयात एवं निर्यात के लिए भुगतान कर सकेंगे. इसके लिए अमेरिकी डॉलर जैसी तीसरी बेंचमार्क मुद्रा को लाए बगैर पूर्व निर्धारित दर पर भुगतान किया जा सकेगा.

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