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भारतीय सेना को जल्द मिलेंगी 1750 बख्तरबंद गाड़ियां और 350 टैंक

Vikash Tiwari

भारतीय सेना की ताकत में जल्‍द और इजाफा होने वाला है. सेना ने 24 जून 2021 को 1750 फ्यूचरिस्टिक इंफैंट्री कॉम्‍बैट व्‍हीकल (FICV) खरीदने के लिए आरएफआई (RFI) जारी किया है. यह खास लड़ाकू वाहन दुश्‍मन के टैंक को तबाह करने और सैनिकों की आवाजाही के लिए उपयुक्‍त होते हैं.

भारतीय सेना ने इसकी जरूरत बताई है और स्‍वदेशी एफआईसीवी के लिए यह आरएफआई जारी की है. इसी क्रम में अब भारतीय सेना 1980 के दशक में खरीदे गए लड़ाकू वाहनों को बदलने के लिए नई इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल खरीदने की तैयारी कर रही है. इसके अतिरिक्त 350 हल्के टैंक भी खरीदे जाएंगे.

Indian Army issues Request for Information for plans to acquire 1750 Futuristic Infantry Combat Vehicles under the Make in India, to destroy enemy tanks & carry troops. Indian Army says it wants to deploy vehicles in places like Eastern Ladakh along with desert&amphibious terrain pic.twitter.com/QrVrjfit2z

— ANI (@ANI) June 24, 2021

भारतीय सेना मजबूत स्थिति में

सेना ने कहा कि वह इन वाहनों को पूर्वी लद्दाख के साथ-साथ रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों में तैनात करना चाहती है. भारतीय सेना अपने को मजबूत करने में लगी है. ये युद्धक वाहन मेक इन इंडिया पहल के तहत खरीदे जाएंगे. इन वाहनों की दुश्मनों के टैंक नष्ट करने में बड़ी भूमिका होती है. इसके अलावा ये सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर भी सुरक्षित पहुंचाते हैं.

'मेक-इन-इंडिया' के तहत खरीदने की योजना

भारतीय सेना ने कहा कि हल्‍के टैंकों को 'मेक-इन-इंडिया' और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)- 2020 के तहत खरीदने की योजना है. भारतीय सेना ने कहा है कि वह चाहती है कि उसके 25 टन से कम के टैंक का उपयोग उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र (HAA), सीमांत इलाके (रण), उभयचर संचालन आदि में संचालन के लिए किया जाए.

तीन चरणों वाला मॉडल प्रस्तावित

इन वाहनों की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सेना ने तीन चरणों वाला मॉडल प्रस्तावित किया है. इसके लिए भारतीय कंपनियां विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकती है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ठेका मिलने के दो साल के भीतर हर साल 75-100 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (से एफआईसीवी) सेना को मिल सके.

25 टन से कम वजनी टैंक

सेना का कहना है कि वह 25 टन से कम वजनी टैंक चाहती है ताकि ऊंची से ऊंची पहाड़ियों में भी उनको तैनात किया जा सके. भविष्य के खतरों का मुकाबला करने के लिए ये टैंक अत्याधुनिक तकनीक, हथियार प्रणाली के साथ-साथ उच्च सुरक्षा उपायों से लैस होंगे.

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