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भारतीय रेल ने रेलों के संचालन और यात्री सुविधा को बेहतर बनाने हेतु विभिन्न आईटी पहलों की शुरुआत की

भारतीय रेल ने 06 सितंबर 2018 को रेलों के संचालन और यात्री सुविधा को बेहतर बनाने के लिए विभिन्‍न आईटी पहलों की शुरुआत की हैं.

भारतीय रेल ट्रेनों के संचालन और यात्री सुविधा को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा से अग्रणी रहा है.

प्रमुख पहल:

नए तकनीक के द्वारा रेलों की जानकारी रखना:

भारतीय रेल जीपीएस उपकरणों की मदद से रेलों की जानकारी रखता है. इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए और एक सतत समाधान हेतु वास्‍तविक समय रेल जानकारी प्रणाली (आरटीआईएस) को लागू किया गया है. इस प्रणाली के अंतर्गत जीपीएस उपकरण उपग्रह संचार का उपयोग करते हुए जानकारी भेजेंगे. इसके परीक्षण सफल रहे हैं.

स्‍टेशन मास्‍टर द्वारा दी जाने वाली जानकारी को कम्‍प्‍यूटरीकृत करने के लिए ट्रेन सिग्‍नल रजिस्‍टर को 650 स्‍टेशनों पर लागू किया गया है. इसके तहत स्‍टेशन मास्‍टर के टेबल से ट्रेनों के आगमन/ प्रस्‍थान की जानकारी सीधे नियंत्रण कार्यालय अनुप्रयोग (सीओए) और राष्‍ट्रीय रेल जानकारी प्रणाली (एनटीईएस) तक पहुंच जाएगी.

हाथ में रखे जाने वाले उपकरण:

ट्रेन टिकट परीक्षकों को हाथ में रखे जाने वाले उपकरण (एचएचटी) दिए जा रहे हैं ताकि वे आरक्षित कोचों की जांच कर सकें, खाली बर्थों को आवंटित कर सकें तथा उपलब्‍ध सीटों/बर्थों की जानकारी अगले स्‍टेशनों तक भेज सकें. एचएचटी उपकरण द्वारा टिकट अनुप्रयोग तथा अतिरिक्‍त किराया संग्रह का कार्य भी किया जा सकता है.

आईआरसीटीसी:

पिछले चार वर्षों के दौरान वेबसाइट की क्षमता 2,000 टिकट प्रति सेकेंड से बढ़कर 20,000 टिकट प्रति मिनट हो गई है. क्षमता में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसके अतिरिक्त उपयोगकर्ताओं की सुविधा और आसानी के लिए वेबसाइट में कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं.

पेपरलेस अनारक्षित टिकट:

मुम्‍बई में 25 दिसम्‍बर 2014 को मोबाइल फोन पर पेपरलेस अनारक्षित टिकट की शुरुआत हुई. इस सुविधा का मुम्‍बई, चेन्‍नई, कोलकाता और सिकन्‍दराबाद के उप-नगरीय खंडों तथा दिल्‍ली–पलवल रेल खंड में विस्‍तार किया गया है.

रेलों के अनारक्षित डिब्‍बों में यात्रा करने हेतु यात्रियों को अब टिकट लाइन में खड़े होकर टिकट लेने की आवश्‍यकता नहीं है. मोबाइल फोनों पर क्‍यूआर कोड के साथ टिकट उपलब्‍ध करा दिए जाते हैं. इससे यात्रियों को बहुत सुविधा हुई है. लगभग चार लाख यात्री प्रतिदिन मोबाइल फोनों पर टिकट प्राप्‍त कर रहे हैं.

भारतीय रेल ई-खरीद प्रणाली:

वस्‍तुओं, सेवाओं और कार्यों की पूरी निविदा प्रक्रिया भारतीय रेल ई-खरीद प्रणाली (आईआरईपीएस) पर उपलब्‍ध है. इसमें स्‍क्रैप बिक्री की ई-नीलामी भी शामिल है. इस प्रक्रिया से पारदर्शिता, कुशलता और व्‍यापार को आसान बनाने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में सहायता मिली है. वर्ष 2017-18 के दौरान 1,50,000 करोड़ रुपये मूल्‍य की 4,44,000 ई-निविदाएं जारी की गईं. ई-नीलामी के माध्‍यम से 2800 करोड़ रुपये मूल्‍य के स्‍क्रैप की बिक्री हुई. आईआरईपीएस वेबसाइट पर 90,000 विक्रेताओं ने पंजीकरण कराया है.

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