Advertisement

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2018 विश्वभर में मनाया गया

विश्वभर में 08 सितंबर 2018 को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया. इस वर्ष का विषय था –साक्षरता और कौशल विकास (Literacy and skills development).

इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक रूप से साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालना है. यह उत्सव दुनियाभर में मनाया जाता है. पूरी दुनिया में साक्षरता बढ़ाने के लिए इसे मनाया जाता है. आज भी विश्व में अनेक लोग निरक्षर है. इस दिवस को मनाने का मुख्य लक्ष्य विश्व में सभी लोगो को शिक्षित करना है. बच्चे, वयस्क, महिलाओं और बूढों को साक्षर बनाना ही इसका मुख्य लक्ष्य है.

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस?

मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. भारत में या देश-दुनिया में गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरूरी है. ये क्षमता सिर्फ साक्षरता में है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है.

साक्षरता दिवस लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने हेतु और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए मनाया जाता है. इस दिवस को व्यक्ति, समाज और समुदाय के लिये साक्षरता के बड़े महत्व को ध्यान दिलाने के लिए विश्व भर में मनाना शुरु किया गया. इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये वयस्क शिक्षा और साक्षरता की दर को ध्यान दिलाने के लिये खासतौर पर मनाया जाता है.

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण:

राष्‍ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण राष्‍ट्रीय स्‍तर की शीर्ष एजेंसी है. राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण वर्ष 1988 से अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाता है. स्वतंत्रता के बाद से निरक्षरता समाप्त करना भारत सरकार के लिए प्रमुख चिंता का विषय रहा है. अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर निरक्षरता समाप्त करने के लिए जन जागरुकता को बढ़ावा और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों के पक्ष में वातावरण तैयार किया जाता है.

यूनेस्को द्वारा साक्षरता पुरस्कार:

इस दिवस पर यूनेस्को द्वारा अपने मुख्यालय पेरिस में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार दिए जाते हैं. इस श्रेणी में पांच पुरस्कार शामिल होते हैं. अंतरराष्ट्रीय पाठन एसोसिएशन साक्षरता पुरस्कार, नोमा साक्षरता दिवस, यूनेस्को किंग सेजोंग साक्षरता पुरस्कार, द मालकॉम एडीसेशिया अंतरराष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार एवं यूनेस्को कन्फ़्यूशियस साक्षरता पुरस्कार.

                  भारत में साक्षरता:

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 22 प्रतिशत लोग अनपढ़ हैं.

केरल भारत का सबसे अधिक साक्षर राज्य है जिसमें 93.91 लोग शिक्षित हैं, इसके बाद लक्षद्वीप में 92.28 प्रतिशत, मिज़ोरम में 91.58 प्रतिशत, त्रिपुरा में 87.75 प्रतिशत एवं गोवा में 87.40 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं.

बिहार एवं तेलंगाना में सबसे कम लोग शिक्षित हैं, वहां क्रमशः 63.82 प्रतिशत एवं 66.50 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं. वर्ष 2014 में भारत की साक्षरता दर में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गयी.

धार्मिक आधार पर आंकड़ों के अनुसार, भारत के मुस्लिमों में सबसे अधिक 42.72 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं. हिन्दुओं में 36.40 प्रतिशत, सिखों में 32.49 प्रतिशत एवं बौद्ध लोगों में 28.17 प्रतिशत एवं ईसाईयों में 25.66 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं.

जैन सबसे अधिक शिक्षित हैं, इनमें 86.73 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं जबकि 13.57 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं.भारत में लगभग 61.6 प्रतिशत पुरुष एवं 38.4 प्रतिशत महिलाएं स्नातक स्तर से ऊपर पढ़े हैं.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कैसे मनाते है?

इस दिन स्कूल, कालेजों में लेखन, व्याख्यान, भाषण, कविता, खेल, निबंध, चित्रकला, गीत, गोलमेज चर्चा, सेमीनार जैसे कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. शिक्षक 'अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस' पर भाषण देते है. इस दिवस पर न्यूज चैनेल के द्वारा खबरों का प्रसारण और प्रेस कांफेरेंस किया जाता है. टीवी पर अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस से जुडी समस्याओं पर कार्यक्रम दिखाया जाता है. इस दिन ऐसी संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाता है जो देश और दुनिया में लोगो को पढ़ाने का काम कर रही है.

              साक्षरता बढ़ाने के उपाय:

साक्षरता बढ़ाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता के अलावा उनको प्रोत्साहन देना होगा. हमारे यहां ज्यादातर स्कूलों का समय सुबह में शुरू होता है और दिन के 3-4 बजे समाप्त हो जाता है. ऐसे में इन गरीब बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना मुमकिन नहीं होता है क्योंकि जो स्कूल का समय होता है, उस दौरान वे काम कर रहे होते हैं. उनकी समस्या को देखते हुए स्कूलों के शेड्यूल को लचीला बनाया जाना चाहिए ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर सकें. गरीबी की समस्या के कारण देश में बच्चों की एक बड़ी आबादी को परिवार के भरण-पोषण के लिए काम करना पड़ता है.

पृष्ठभूमि:

विश्व कांग्रेस के शिक्षा मंत्रियों ने वर्ष 1965 में इसी दिन तेहरान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए पहली बार बैठक की थी. यूनेस्को ने नवंबर 1966 में अपने 14वें सत्र में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया तभी से सदस्य देशों द्वारा प्रतिवर्ष 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का महत्वपूर्ण पहलू साक्षरता के खिलाफ संघर्ष के पक्ष में जनमत तैयार करना है. पहला ‘अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ 8 सितंबर 1966 को मनाया गया था.

यह भी पढ़ें: शिक्षक दिवस 05 सितंबर को देश भर में मनाया गया

 

 
Advertisement

Related Categories

Advertisement