जेट एयरवेज के उड़ान की उम्मीदें खत्म, निराश हुए कर्जदाता

कर्ज में डूबी प्राइवेट सेक्‍टर की एयरलाइन जेट एयरवेज के उड़ान की उम्‍मीदें अब करीब-करीब खत्‍म हो गई हैं. दरअसल,  भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में बैंकों के ग्रुप ने जेट एयरवेज के भविष्‍य को लेकर अहम बैठक की. बैंको के समूह ने इस बैठक में एयरलाइन को फिर खड़ा करने की अपनी ओर से की जा रही कोशिश छोड़ दी है.

बैंकों के समूह ने जेट एयरवेज में फंसे अपने कर्ज के समाधान का मामला दिवाला संहिता के तहत कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में भेजने का फैसला किया है.

कारण क्या है?

बैकों को अब तक के प्रयास में जेट एयरवेज के पुनरोद्धार हेतु किसी इकाई से कोई पुख्ता प्रस्ताव नहीं मिला है. हालांकि एतिहाद-हिंदुजा गठजोड़ ने एयरलाइन में रुचि दिखाई है लेकिन उसकी ओर से कोई ठोस प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है. इसी वजह से बैंकों की 17 जून 2019 को हुई बैठक में एयरलाइन के मामले को एनसीएलटी में भेजने का फैसला किया गया.

एसबीआई द्वारा दिया गया बयान

एसबीआई ने बयान में कहा की कर्जदाताओं ने गहन विचार विमर्श के बाद फैसला किया है कि दिवाला संहिता के तहत जेट एयरवेज के मामले का निपटान किया जाए. यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि संभावित निवेशक सौदे के तहत सेबी के कुछ छूट चाहता है. इस तरह का सौदा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत बेहतर तरीके से हो सकता है. एसबीआई ने कहा कि कर्जदाता ठप खड़ी विमानन कंपनी का समधान दिवाला संहिता (आईबीसी) से बाहर निपटाना चाहते थे, लेकिन अब आईबीसी के द्वारा ही निपटान का फैसला किया गया है.

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पृष्ठभूमि:

बैंकों को एयरलाइन से करीब 8,000 करोड़ रुपये की वसूली करनी है. वहीं जेट एयरवेज का परिचालन 17 अप्रैल 2019 से बंद है. इससे एयरलाइन के करीब 23,000 कर्मचारियों का कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया जा सका है. साथ ही इससे हवाई किराये में औसतन 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है. यही नहीं, घरेलू एयरपोर्ट पर एयरलाइन के स्लॉट सरकार ने अन्य विमानन कंपनियो को दे दिए हैं. इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी उसके कुछ स्लॉट अन्य एयरलाइन को दिए गए हैं.

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