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महाराष्ट्र सरकार ने ओबीसी समुदाय को 500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि देने की घोषणा की

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोगों को 500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है.

महाराष्ट्र सरकार के इस कदम से, राज्य सरकार ने नौकरियों में ओबीसी कोटा बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है और उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि आरक्षण उद्देश्य के लिए मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जा सकता है.

यह घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस द्वारा राष्ट्रीय ओबीसी परिषद के तीसरे सम्मेलन को संबोधित करते हुए की गई.

घोषणा के मुख्य तथ्य


•    ओबीसी समुदाय को विशेष सहायता दिए जाने के पीछे मुख्य उद्देश्य ओबीसी समुदाय के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को विकसित करने में मदद करना है.

•    इसके अलावा, राज्य सरकार नौकरियों में ओबीसी को दिए गए प्रतिनिधित्व की सीमा का आकलन करने और समय-समय पर बैकलॉग की पूर्ति करने के लिए कदम उठाने की योजना बना रही है.

•    राज्य सरकार ने 19 जिलों में ओबीसी समुदाय के छात्रों के लिए होस्टल बनाये जाने की योजना का खाका भी तैयार कर लिया है.

•    महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को यह सिफारिश की है कि भारत का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान, भारत रत्न, 19वीं सदी के समाज सुधारक ज्योतिबा फुले एवं उनकी पत्नी एवं महिला साक्षरता की पुरजोर समर्थक सावित्रीबाई फुले को दिया जाना चाहिए.

पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र की कुल आबादी का 52 प्रतिशत ओबीसी समुदाय से सम्बंधित है. जहां तक आरक्षण की बात है तो राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 17 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है.

दूसरी ओर, राजनीतिक कारणों से प्रेरित मराठा समुदाय के लोगों ने राज्य में हाल ही में आरक्षण की मांग करते हुए आंदोलन किया था. महाराष्ट्र में कुल आबादी का 30 प्रतिशत मराठा समुदाय है. मराठा समुदाय के लोग शिक्षा एवं नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

 

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