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रेल मंत्रालय ने पहली स्वर्ण राजधानी ट्रेन आरंभ की

यात्रा अनुभव में सुधार के लिए रेल मंत्रालय ने परियोजना स्वर्ण के तहत प्रमुख राजधानी और शताब्दी गाड़ियों को उन्नत बनाने का निर्णय किया है. उन्नत यात्री सुविधाओं, गाड़ियों की सुदंरता और साफ-सफाई के स्तर में सुधार के साथ देश की पहली स्वर्ण राजधानी (गाड़ी नम्बर 12313 नई दिल्ली-सियालदह) की 29 नवंबर 2017 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरूआत की गयी.

परियोजना स्वर्ण के तहत राजधानी और शताब्दी गाड़ियों में यात्री अनुभव में सुधार के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम बनाया गया है. इस संबंध में 10 मदों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है -  कोच के अंदर की दशा, प्रसाधन,  कोच के अंदर सफाई की स्थिति,  समय की पाबंदी, खान-पान, बिस्तर, स्टाफ का व्यवहार,  सुरक्षा, कोच के अंदर मनोरंजन सुविधा तथा रीयल टाइम फ़ीडबैक.

इस कार्यक्रम के लिए मंत्रालय ने 9 टीमें बनाई हैं. हर टीम में रेलवे बोर्ड के दो अधिकारी शामिल हैं. ये टीमें परियोजना स्वर्ण के तहत उपरोक्त सभी 10 मदों की प्रगति की निगरानी करेंगी. परियोजना के पहले चरण के लिए 14 राजधानी और 15 शताब्दी गाड़ियों को चुना गया है.

पहली स्वर्ण राजधानी ट्रेन की विशेषताएं

•    अंतर्राष्ट्रीय रंग संयोजन के अनुरूप डिब्बों को अंदर से पेंट किया गया है और एलईडी प्रकाश व्यवस्था की गयी है.

•    शौचालयों में ‘ऑटो जेनिटर’ के जरिए बेहतर साफ-सफाई उपलब्ध करायी गयी है.

•    स्वास्थ्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर वॉश बेसिन लगाये गये हैं और साबुन की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है। इसके अलावा बेहतर डस्टबिन भी रखे गये हैं.

•    बर्थ नंबर और अन्य सुविधा देने के लिए अंधेरे में देखे जाने योग्य संकेतक लगाये गये हैं.


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•    प्रथम श्रेणी वातानुकुलित डिब्बे के यात्रियों के लिए दो अलग-अलग रंग के कंबलों की व्यवस्था की गयी है. अप और डाउन गाड़ियों में अलग-अलग रंग के कंबल होंगे.

•    ऊपर की बर्थ पर आसानी से पहुंचने के लिए प्रथम श्रेणी वातानुकुलित डिब्बे में सीढ़ी लगाई गयी है.

•    दरवाजों और बर्थ के आस-पास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं.

•    यात्रियों का फीडबैक जानने के लिए तीन पायलट कोच सेवा में हैं.

•    दरवाजों और बर्थ के आस-पास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं.

(स्रोत: पीआईबी)

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