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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में 2,900 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 फरवरी 2019 को वाराणसी का दौरा किया. उन्होंने यहां कई विकास परियोजनाओं का अनावरण किया. प्रधानमंत्री ने वाराणसी में डीज़ल लोकोमोटिव वर्क्स में डीजल से बिजली में परिवर्तित पहले इंजन को झंडी दिखाकर रवाना किया. उन्होंने लोकोमोटिव का अवलोकन किया और प्रदर्शनी का दौरा भी किया.

प्रधानमंत्री द्वारा वाराणसी में आरंभ परियोजनाएं

•    प्रधानमंत्री मोदी ने सड़क, पर्यटन, स्वास्थ्य, पेयजल और आवास की 39 परियोजनाओं का लोकार्पण किया.

•    प्रधानमंत्री ने श्रीगोर्वधनपुर में श्री गुरु रविदास जन्म स्थान मंदिर में गुरु रविदास जन्म स्थान विकास परियोजना का शिलान्यास किया.

•    प्रधानमंत्री ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नवनिर्मित मदन मोहन मालवीय कैंसर केन्द्र का उद्घाटन किया.

•    यह अस्पताल उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड सहित नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के मरीजों को सस्ता कैंसर उपचार प्रदान करेंगे.

•    प्रधानमंत्री ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल लहरतारा का भी उद्घाटन किया. इन दोनों कैंसर अस्पतालों के उद्घाटन के जरिए वाराणसी कैंसर संबंधी बीमारियों के बेहतर उपचार के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र बन जाएगा.

•    प्रधानमंत्री ने पहले नये भाभाट्रॉन प्रीसिजन टेक्नोलॉजी (मल्टी लीफ कॉलीमेटर) का लोकार्पण भी किया.

•    पीएम मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा और वाराणसी घाटों के भित्तिचित्रों का अनावरण किया. उन्होंने विश्वविद्यालय में पीएम-जेएवाई आयुष्मान भारत के लाभार्थियों से बातचीत भी की.

•    इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी स्थित औरे गांव में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनका उद्देश्य वाराणसी और आस-पास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य तथा अन्य सुविधाओं को बढ़ावा देना है.

•    उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया. उन्होंने दिव्यांगजनों को सहयोगी उपकरण भी वितरित किये.

डीज़ल से बिजली में परावर्तित इंजन

डीजल लोकोमोटिव वर्क्स ने दो डब्ल्यूडीजी-3ए डीजल इंजनों को 10 हजार अश्वशक्ति वाले दोहरे इलेक्ट्रिक डब्ल्यूएजीसी-3ए लोको में परिवर्तित किया है. यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारतीय अनुसंधान एवं विकास नवाचार के जरिए किया गया है. परिवर्तित इंजनों से ग्रीन हाऊस गैस उत्सर्जन कम होगा और भारतीय रेल के लिए कारगर इंजन तैयार होंगे.

 

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