नासा ने चांद के इर्द-गिर्द घूम रहे जल अणुओं की खोज की

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के लुनर रिकॉनसाइंस ऑर्बिटर (एलआरओ) यान ने पृथ्वी से नजर आने वाले चंद्रमा के हिस्से में पानी के अणु खोजने में सफलता पाई है. हालांकि, ये अणु एक जगह पर स्थिर नहीं है.

नासा जल्द ही अंतरिक्षयात्रियों को चांद पर भेजने की योजना में है, ऐसे में यह खोज काफी मददगार साबित हो सकती है. यह जानकारी जर्नल 'जियोफिजिकल रिसर्च लैटर्स' में प्रकाशित हुई है.

मुख्य बिंदु:

   इस खोज खोज से चांद पर पानी की पहुंच के बारे में जानने में मदद मिल सकती है जो भविष्य के चंद्र मिशनों में मानव द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है.

   गौरतलब है कि बीते एक दशक तक वैज्ञानिकों का मानना था कि चांद शुष्क है और अगर कहीं पानी है तो वह चांद के हमेशा रात में रहने वाले दूसरे हिस्से में ध्रुवों के निकट बने गड्ढों में बर्फ के रूप में हो सकता है.

   नासा के एक बयान में कहा गया है कि हाल ही में वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी की सतह पर पानी के अणुओं की बेहद कम मौजूदगी का पता लगाया है.

   वर्ष 2009 में लांच हुए एलआरओ में लगे लीमैन अल्फा मैपिंग प्रोजेक्ट (लैंप) उपकरण की मदद से चांद की सतह से लगे पानी के अणुओं की परत का पता लग पाया है.

इस अध्ययन के बाद यदि वैज्ञानिक चांद पर पानी खोजने में सफल होते हैं तो इससे आने वाले चंद्र मिशन काफी किफायती हो जाएंगे. प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक अमांदा हेंड्रिक्स ने कहा की अंतरिक्ष यात्री चांद के पानी का इस्तेमाल ईंधन बनाने और विकिरण से बचाने वाले उपकरणों हेतु कर सकते हैं. इससे मिशन पर आने वाला खर्च कई गुना कम हो जाएगा.

बीते दशक तक माना जा रहा था कि चांद की सतह बंजर है, लेकिन हाल के अध्ययनों से यह मान्यता बदलती जा रही है. ताजा अध्ययन के अनुसार, चांद की सतह पर मौजूद पानी के अणु की मात्रा व स्थिति बदलती रहती है. उच्च अक्षांशों पर इसकी मात्रा अधिक है. सतह के गर्म होने के साथ ही इसकी स्थिति बदल जाती है.

 

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