बुर्किना फासो में मलेरिया रोधी दवा का सफल परीक्षण किया गया: लांसेट रिपोर्ट

द लांसेट जर्नल में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में मलेरिया जैसी घातक समस्या से निपटने हेतु मलेरिया जनक मच्छरों की रोधी दवा का परीक्षण किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार ‘आइवरमेक्टिन’ (Ivermectin) नामक इस दवा का विभिन्न लोगों पर परीक्षण किया गया जिसके बाद इसके सकारात्मक नतीजों के बारे में बताया गया है.

आइवरमेक्टिन परीक्षण

•    शोधकर्ताओं ने इस शोध के लिए 18 सप्ताह के परीक्षण के दौरान मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए मास आइवरमैक्टिन की प्रक्रिया का पालन किया.

•    इस अध्ययन में लगभग 2,700 लोगों पर प्रयोग किया गया. इनमें बुर्किना फासो के 590 बच्चों को भी शामिल किया गया.

•    परीक्षण में यह बात सामने कि आइवरमेक्टिन दवा लेने के पश्चात् लोगों का रक्त मच्छरों के लिये घातक हो जाता है जिससे पुन: दूसरों को काटने और संक्रमित करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है.

•    इस दवा के परीक्षण के लिये बुर्किना फासो के आठ गाँवों के 590 बच्चों सहित 2,700 लोगों को शामिल किया गया.

•    जिस स्थान पर इस दवा का प्रयोग किया गया वहां औसतन 2 बच्चे मलेरिया से ग्रसित थे.

 



मलेरिया रोधी दवा की आवश्यकता


•    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरे विश्व में मलेरिया से एक वर्ष के दौरान 200 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हो जाते हैं जबकि आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में इससे 4,35,000 लोगों की मौत हो गई. विश्व में सबसे अधिक अफ्रीका के लोग मलेरिया से प्रभावित होते हैं.

•    आइवरमैक्टिन नामक दवा का उपयोग पहले से ही परजीवियों से होने वाले संक्रमण को रोकने में होता रहा है लेकिन मलेरिया को लेकर इसका परीक्षण पहली बार किया गया है.

•    यह दवा मलेरिया नियंत्रण की अन्य विधियों के साथ प्रयुक्त करने से अधिक प्रभावी होगी.

•    वैज्ञानिकों का मानना है कि मलेरिया के खिलाफ दी जाने वाली दवाएं कारगर साबित नहीं हो रही हैं क्योंकि मच्छर उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो गए हैं जो उन्हें आमतौर पर दी जाती हैं. इसलिए विश्व में मलेरिया रोधी दवा की सख्त आवश्यकता है.

 

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